पणजी, 28 नवंबर (आईएएनएस)। ब्रिटिश फिल्म संपादक हम्फ्रे डिक्सन ने शुक्रवार को कहा कि वह एक फिल्म संपादक के रूप में भारत की संस्कृति से जुड़ कर खुश हैं।
46वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) से इतर ‘मीट द डायरेक्टर’ कार्यक्रम में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए डिक्सन ने कहा, “फिल्मों का संपादन करना बेहद मुश्किल काम है और इसके लिए काफी अनुभव की जरूरत होती है। संपादन करने वाले को यह विश्लेषण करना आना चाहिए कि क्या हटाया जाए और क्या नहीं। डिक्सन ने कहा, “मुझे संपादन बेहद पसंद है।”
हम्फ्रे डिक्सन ने अपने करियर की शुरुआत लंदन के पहले कमर्शियल टीवी चैनल एसोसिएटिड-रेडिफ्यूजन में फिल्म प्रशिक्षु के रूप में की थी।
अपना पूरा वक्त संपादन में लगाने का फैसला लेने के बाद वह बहुत तेजी से सहायक से फ्रीलांस फिल्म संपादक बनने की ओर बढ़े। उन्होंने ज्यादातर सप्ताहांत टीवी साप्ताहिक आर्ट्स कार्यक्रम ‘द साउथ बैंक शो’ और फीचर लेंथ ‘सॉन्ग रिमेन्स द सेम’ समेत डॉक्यूमेंट्रीज पर काम किया।
फीचर फिल्मों के संपादन में अपने पांव पसारते हुए उन्होंने जेम्स आइवरी की एक राजकुमार पर आत्मकथा का संपादन किया। इसके बाद उन्होंने कंपनी के लिए आठ और फीचर्स का संपादन किया जिनमें से दो तो भारत आधारित थीं। उन्हें ‘ए रूम विद ए व्यू’ में अपने बेहतरीन काम के लिए बाफ्टा में नामांकित किया गया था।
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