तिरुवनंतपुरम, 30 नवंबर (आईएएनएस)। विपक्ष के हंगामे के बीच केरल विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को पहले दिन ही स्थगित कर दी गई। अध्यक्ष एन. सकथन द्वारा बार रिश्वतखोरी मामले में चर्चा का प्रस्ताव ठुकरा दिए जाने के बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा कर दिया।
सत्र केवल दो घंटे ही चला, क्योंकि विपक्षी वाम मोर्चा लगातार आबकारी मंत्री के. बाबू के इस्तीफे की मांग कर रहा था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कोदियेरी बालाकृष्णन ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल जब रिश्वतखोरी का मामला उठा तो सरकार ने तत्कालीन वित्तमंत्री के. एम. मणि का बचाव किया था, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में इस्तीफा दे दिया था।
बालाकृष्णन ने कहा, “मणि के खिलाफ आरोप था कि उन्होंने एक करोड़ रुपये रिश्वत ली थी, जबकि बाबू के खिलाफ 10 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। हैरानी की बात है कि मणि ने तो इस्तीफा दे दिया है, लेकिन बाबू फिर भी मंत्रिमंडल में बने हुए हैं। जब तक वह इस्तीफा नहीं देंगे हम चुप नहीं बैठेंगे।”
गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने बालाकृष्णन द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को अस्वीकार कर दिया।
चेन्निथला ने कहा, “दोनों मामले अलग हैं। मणि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन बाबू के मामले में प्रारंभिक जांच में लेशमात्र भी सबूत नहीं मिला है।”
बाबू ने कहा कि सतर्कता जांच में उन्हें जून में क्लिन चिट दे दी गई थी।
बाबू ने कहा, “विधानसभा का सत्र 30 जुलाई तक था, लेकिन तब इस मुद्दे को नहीं उठाया गया। वाम मोर्चा इसे चार महीने बाद उठा रहा है। आप कहते हैं कि अदालतों में आपकी पूरी निष्ठा है तो क्या यह सही नहीं है कि आप अदालत के फैसले तक इंतजार करें।”
विपक्ष के नेता वी.एस. अच्युतानंदन ने कहा कि जब पिछले वर्ष विपक्ष ने रिश्वतखोरी के मामले को उठाया था, तब केरल सरकार मणि को क्लीन चिट देने की जल्दी में थी।
सभापति द्वारा स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की विपक्ष की मांग को नामंजूर कर देने के बाद तकरार बढ़ गई।
विपक्षी विधायक जैसे ही नारे लगाते हुए अध्यक्ष की ओर बढ़े, अध्यक्ष ने दिन के कामकाज की सूची पर नजर डाली और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
बाद में विधानसभा के बाहर बाबू के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के साथ अच्युतानंदन भी शामिल हो गए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी बाबू के इस्तीफे की मांग करते हुए विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
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