भारत के बुनियादी मूल्यों की रक्षा करेगी न्यायपालिका : ठाकुर

नई दिल्ली, 6 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधान न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर ने रविवार को कहा कि मजबूत और स्वतंत्र न्यायपालिका समावेशी मूल्यों पर हमले से लोगों को बचाने के लिए सक्षम है।

देश के प्रधान न्यायाधीश का पदभार संभालने के बाद ठाकुर पहली बार संवाददाताओं से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा, “कानून के राज और संविधान की हिफाजत करने वाली संस्था के प्रमुख की हैसियत से मैं कह रहा हूं कि समाज के सभी तबकों के अधिकारों को सुरक्षित रखा जाएगा।”

उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कैसे राजनैतिक लोग बातों को अपने हिसाब से मोड़ लेते हैं। उन्होंने कहा, “हमारा अस्तित्व ही सहिष्णुता पर निर्भर है।”

लोगों के अधिकारों की हिफाजत के प्रति आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा, “हम समाज के सभी तबकों के अधिकारों की सुरक्षा करने में सक्षम हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है। “

उन्होंने कहा कि नागरिकों की ही बात नहीं है। सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, “कानून का राज तो गैर नागरिकों के लिए भी है।”

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “इतना बड़ा देश है। कुछ आवाज तो उठती ही रहती है। जब तक कानून का राज, संवैधानिक गारंटी और स्वतंत्र न्यायपालिका है, तब तक किसी बात का डर नहीं होना चाहिए।”

भारत की समृद्ध, समावेशी परंपराओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा, “यह देश दुनिया के सभी धर्मो का घर है। अन्य जगहों पर उत्पीड़न का शिकार हुए लोग यहां आए और फले-फूले।”

इस परंपरा को अपनी धरोहर बताते हुए प्रधान न्यायाधीश ने फारस से आए पारसी समुदाय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसी समुदाय से देश को सबसे अच्छे उद्योगपति मिले और सबसे अच्छे कानूनी जानकार भी। उनका इशारा नानी पालकीवाला और फली नारीमन जैसे कानून विशेषज्ञों की तरफ था।

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