मेक्सिको सिटी/नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। मेक्सिको सरकार ने दुनिया के पहले डेंगू रोधी टीके को मंजूरी दे दी है और इसके साथ ही हर साल डेंगू का प्रकोप झेलने वाले भारत में इस टीके को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
इस टीके को नौ से 45 वर्ष तक की आयु के लोगों में डेंगू के चारों तरह के संक्रमण से बचाव के लिए तैयार किया गया है।
‘डेंगवैक्सिया’ नामक इस टीके को फ्रांस की औषधि निर्माता कंपनी सनोफी पाश्च्योर ने तैयार किया है। पिछले दो दशकों से गहन नैदानिक प्रयोगों के बाद इस टीके के अंतिम स्वरूप को मंजूरी दी गई।
सनोफी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवियर ब्रांडीकोर्ट ने बुधवार को जारी बयान में कहा, “आज डेंगवैक्सिया को मंजूरी मिलने के साथ हमने डेंगू से बचाव के लिए टीके की खोज का लक्ष्य हासिल कर लिया है।”
उन्होंने कहा, “यह हमारी कंपनी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए काम करने वाले वैश्विक समुदाय के लिए ऐतिहासिक क्षण है और सबसे बढ़कर डेंगू के खतरे की जद में आने वाली दुनिया की आधी आबादी के लिए भी यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।”
दक्षिणी अमेरिका और एशिया के उष्टकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय देशों के डेंगू के सर्वाधिक जोखिम वाले इलाकों में निवास करने वाली करीब 40 करोड़ की आबादी डेंगू से पीड़ित है, वहीं भारत में इस साल डेंगू का सर्वाधिक प्रकोप देखने को मिला। अक्टूबर तक सिर्फ नई दिल्ली में ही डेंगू से 32 लोगों की मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नई दिल्ली में अक्टूबर में डेंगू के मामलों की कुल संख्या 12,000 से ऊपर पहुंच गई, जो पिछले 19 वर्षो में सर्वाधिक है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में इस वर्ष डेंगू से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां डेंगू से आखिरी मृत्यु पांच नवंबर को हुई थी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डेंगू के सर्वाधिक खतरे वाले देशों को 2020 तक डेंगू से होने वाली मृत्यु में 50 प्रतिशत तक कमी लाने और संक्रमण में 25 प्रतिशत तक कमी लाने का आह्वान किया है।
डेंगवैक्सिया को औषधि विज्ञान के क्षेत्र में बेहद अहम नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
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