अहमदाबाद, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने अहमदाबाद और जयपुर हवाईअड्डों का संचालन और प्रबंधन सिंगापुर की एक कंपनी को सौंपने के केंद्र सरकार के निर्णय को सुनौती दी है।
पटेल ने नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू को पत्र लिखकर दोनों हवाईअड्डों का संचालन सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज के साथ एक एमओयू के जरिए चंगी एयरपोर्ट इंटरनेशनल को देने के कदम पर सवाल उठाया है। इस समझौते पर हस्ताक्षर पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिंगापुर दौरे के दौरान हुआ था।
राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार पटेल ने देश के प्रमुख हवाईअड्डों के संचालन पर लिए गए निर्णय की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
पटेल ने यह पत्र मीडिया को भी जारी किया है। पत्र में लिखा गया है, “सरकार ने अहमदाबाद, जयपुर, चेन्नई और कोलकाता के हवाईअड्डों के संचालन, प्रबंधन और विकास के लिए निविदा जारी करने की पूरी प्रक्रिया 20 अगस्त को आश्चर्यजनक तरीके से रद्द करने का निर्णय लिया और साथ ही एक एमओयू के जरिए अहमदाबाद और जयपुर हवाईअड्डों के संचालन की जिम्मेदारी एक विदेशी कंपनी को देने का निर्णय ले लिया।”
पत्र में कहा गया है, “हवाईअड्डा अवसंरचना पर भारत की नीति ने सार्वजनिक-निजी साझेदारी के एक खुले, परामर्शी और सहकारी मॉडल को प्रोत्साहित किया है, जो भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण के हित की रक्षा करता है और निजी भागीदारी को बढ़ावा देता है।”
पटेल ने पत्र में लिखा है, “मुझे आश्चर्य होता है कि नीति में कोई बदलाव किए बगैर सरकार ने उचित प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर दिया और देश के दो महत्वपूर्ण हवाईअड्डों के प्रबंधन के लिए मनमाना तरीके से एक संचालक कंपनी का चयन कर लिया।”
पटेल ने आगे कहा, “जिस गुपचुप तरीके से सरकार ने इस महत्वपूर्ण निर्णय को लिया, वह समझ से परे है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिल्ली और मुंबई हवाईअड्डों का पुनर्विकास और एक प्रतिस्पर्धी साफ-सुथरी निविदा प्रक्रिया पर आधारित था।
पत्र में कहा गया है, “मुझे यह बात समझ में नहीं आती कि कुशल संचालक चुनने की एक श्रमसाध्य प्रक्रिया अपनाए बगैर और भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण के हितों की रक्षा किए बगैर आखिर सरकार ने किस आधार पर एक खास संचालक को चुन लिया?”
पटेल ने यह भी जानना चाहा है कि इस समझौते के लिए सिर्फ दो हवाईअड्डों को ही क्यों चुना गया।
उन्होंने कहा है, “अहमदाबाद हवाईअड्डा देश में लाभ देने वाले चंद हवाईअड्डों में से है और मैं आशा करता हूं कि नई व्यवस्था से भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण को राजस्व का कोई नुकसान नहीं होगा।”
dharmpath.com dharmpath