राज्यसभा में लंबित 18 विधेयकों पर चर्चा होगी

नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र की अब सिर्फ तीन बैठकें शेष हैं और अब तक राज्यसभा में शायद ही कोई विधायी कार्य हो पाया है। राज्यसभा में अब 18 विधेयकों पर 43 घंटों के शेष समय में चर्चा होगी।

सदन में अरुणाचल प्रदेश की भूमिका और मूल्य वृद्धि पर भी विचार-विमर्श होगा। उधर लोकसभा में बोनस भुगतान और राष्ट्रीय जलमार्ग विधेयकों पर चर्चा होगी।

बीते सप्ताह शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई और इस सत्र की शेष अवधि के दौरान राज्यसभा में कुछ लंबित विधेयकों को पारित करने से संबंधित विषयों पर विचार विमर्श किया।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, राज्यसभा की कार्य सलाहकार समिति ने कुल 18 विधेयकों पर सदन में चर्चा के लिए 43.50 घंटे आवंटित किए हैं। इनमें से सदन में वाणिज्यिक अदालतें, वाणिज्यिक प्रभाग और उच्च न्यायालयों के वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग विधेयक, 2015, मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2015, परमाणु ऊर्जा (संशोधन) विधेयक, 2015-16 के लिए अनुदान (सामान्य) के लिए अनुपूरक मांगों से संबंधित विधेयकों पर चर्चा होगी।

इसके साथ ही वर्ष 2012-13 के लिए अनुदानों (सामान्य) के लिए अतिरिक्त मांग, सत्र के दौरान लोकसभा द्वारा पारित सभी विधेयक और व्हिसल ब्लोअर सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2015, लोकसभा द्वारा पूर्व में पारित किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2015, बाल श्रम (संरक्षण और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2012, जिस पर स्थायी समिति ने दिसंबर, 2013 में अपनी रपट पेश की थी, पर भी चर्चा होगी।

बयान के अनुसार, राज्यसभा में देश की एकता और अखंडता से जुड़े असहिष्णुता मामले, आवश्यक खाद्य वस्तुओं और अनाजों के मूल्यों के अलावा सर्वदलीय बैठक में सरकार द्वारा तय किए गए अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल की भूमिका पर अगले सप्ताह चर्चा होने की संभावना है।

अगले सप्ताह के दौरान लोकसभा में बोनस का भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2015 और राष्ट्रीय जलमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2015 के लिए क्रमश: चर्चा हेतु दो, तीन घंटों का समय आवंटित किया गया है।

बयान में कहा गया है कि इसके अलावा, लोकसभा में नेपाल की स्थिति, भारत-नेपाल संबंधों की स्थिति पर लघु अवधि चर्चा, स्थायी विकास लक्ष्यों पर पुनर्चर्चा की जाएगी, जिन पर पिछले सत्र के दौरान भी विचार-विमर्श किया गया था।

शीतकालीन सत्र के दौरान अब तक हुए कार्य :

26 नवंबर को प्रारंभ हुए वर्तमान शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा द्वारा 12 विधेयक पारित किए जा चुके हैं, जबकि छह विधेयक पेश किए जा चुके हैं।

पारित होने वाले विधेयकों में कैरिएज बाई एयर (संशोधन) विधेयक, 2015, भारतीय मानक विधेयक, 2015, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्ते) संशोधन विधेयक, 2015, भारतीय ट्रस्टी (संशोधन) विधेयक, 2015, उद्योग (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2015 परक्राम्य दस्तावेज (संशोधन) विधेयक, 2015, परमाणु ऊर्जा (संशोधन) विधेयक, 2015, अनुदानों के लिए अतिरिक्त मांग और अनुपूरक मांगों पर चर्चा और मतदान एवं इससे संबंधित विधेयक, चीनी उपकर (संशोधन) विधेयक, 2015, वाणिज्यिक अदालतें, वाणिज्यिक प्रभाग और उच्च न्यायालयों के वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग विधेयक, 2015, मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2015 शामिल हैं।

बयान में कहा गया है कि लोकसभा द्वारा वाणिज्यिक अदालतें, वाणिज्यिक प्रभाग और उच्च न्यायालयों के वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग विधेयक, 2015, मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2015, परमाणु ऊर्जा, श्रमिकों को बोनस का भुगतान, उद्योग और चीनी उपकर से संबंधित पेश किए गए सभी छह नए विधेयकों को पारित कर दिया गया।

लोकसभा में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की 125वीं जन्मशताब्दी के अवसर पर संविधान के प्रति प्रतिबद्धता पर दो दिवसीय विशेष विचार-विमर्श का भी आयोजन किया गया। इसके अलावा असहिष्णुता, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में बाढ़, देश में सूखे की स्थिति और मूल्य वृद्धि जैसे मुद्दे भी उठाए गए।

विदेश मंत्री की इस्लामाबाद यात्रा, जलवायु परिवर्तन और पूर्वोत्तर पर केन्द्रित क्षेत्रीय संपर्क के लिए सड़क परिवहन और राजमार्गो से जुड़ी पहल के संदर्भ में संबंधित मंत्रियों द्वारा स्वत: संज्ञान से तीन वक्तव्य भी दिए गए।

दूसरी ओर राज्यसभा में सिर्फ परक्राम्य दस्तावेज से संबंधित विधेयक पारित हुआ। इसके अलावा अब तक जारी शीतकालीन सत्र के दौरान सदन में कोई भी नया विधेयक पेश नहीं किया गया।

राज्यसभा में संविधान के प्रति प्रतिबद्धता, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में बाढ़ और भारत-नेपाल संबंधों पर भी विचार-विमर्श किया गया। विदेश मंत्री ने अपनी इस्लामाबाद यात्रा पर स्वत: संज्ञान से एक बयान भी दिया।

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