नई दिल्ली, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। कश्मीर के विस्थापित हिन्दुओं ने रविवार को यहां एक बार फिर कश्मीर घाटी के भीतर अपने लिए एक पृथक राज्य की मांग उठाई, जिसे पनुन कश्मीर नाम दिया गया है। विस्थापितों ने कहा कि यह भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्रशासित क्षेत्र होगा।
संस्था की ओर से जारी बयान के अनुसार, यूथ फॉर पनुन कश्मीर (वाई4पीके) द्वारा पनुन कश्मीर के तत्वावधान में यहां आयोजित दूसरे अंतर्राष्ट्रीय कश्मीरी हिन्दू यूथ कांफ्रेंस में यह मांग उठाई गई।
बयान के अनुसार, पनुन कश्मीर घाटी के अंतर्गत एक ऐसा क्षेत्र होगा, जो भारतीय संविधान के तहत एक केंद्रशासित क्षेत्र होगा।
सम्मेलन का विषय ‘पनुन इंडिया रीचेज पनुन कश्मीर’ था, जहां पहली बार विस्थापित कश्मीरी पंडितों के मुद्दे को लेकर पूरे विश्व की राष्ट्रवादी ताकतें एकजुट हुईं।
बयान के अनुसार, राजनीतिक समूह चर्चा में पनुन कश्मीर के अध्यक्ष डॉ. अजय चरंगु सहित विद्वानों, शिक्षाविदों, लेखकों और राजनीतिक हस्तियों ने कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी की दिशा में, उनके अतीत, वर्तमान और भविष्य पर विमर्श किया।
उल्लेखनीय है कि कश्मीरी पंडित 27 दिसंबर को मातृभूमि दिवस स्मरणोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।
बयान के अनुसार, 25 साल पहले 27 दिसंबर, 1990 को कश्मीरी हिंदुओं ने औपचारिक रूप से कश्मीर घाटी के भीतर एक अलग राज्य की मांग उठाई थी, जिसे पनुन (हमारी) कश्मीर का नाम दिया गया था। तभी से इस दिन को समुदाय के सदस्य पूरी दुनिया में होमलैंड दिवस के रूप में मनाते हैं।
बयान में कहा गया है कि सम्मेलन में उद्योग, राजनीति, संस्कृति, सिविल सोसायटी सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने हिस्सा लिया। दुनिया भर से 25 से अधिक नेताओं ने भी इसमें हिस्सा लिया।
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