नई दिल्ली, 31 दिसंबर (आईएएनएस)। मौजूदा कारोबारी वर्ष के प्रथम आठ महीने में देश का वित्तीय घाटा बजटीय अनुमान के 87 फीसदी पर पहुंच गया है, जो चिंताजनक है।
लेखा महानियंत्रक द्वारा जारी विवरण के मुताबिक, नवंबर 2015 के आखिर तक का वित्तीय घाटा 4.84 लाख करोड़ रुपये हो चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए बजटीय अनुमान 5.55 लाख करोड़ रुपये का है और चार महीने अभी बाकी है।
आलोच्य अवधि में सरकार की कुल पावती 6.58 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि खर्च 11.4 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके लिए पूरे वर्ष का बजटीय अनुमान क्रमश: 12.2 लाख करोड़ रुपये और 17.77 लाख करोड़ रुपये है।
वित्तीय घाटे का मतलब उस राशि से है, जिसका भुगतान करने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है।
मोटे आकलन के मुताबिक, कारोबारी साल का दो तिहाई समय बीमा है। इसलिए वित्तीय घाटा भी लक्ष्य का दो-तिहाई यानी, 66-70 फीसदी तक होना चाहिए, जबकि यह 87 फीसदी स्तर पर पहुंच चुका है, इसलिए पूरी संभावना है कि साल पूरो होते-होते यह बजटीय अनुमान से अधिक हो जाएगा।
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