वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से चलाया जाए नवाचार : मोदी

मैसूर, 3 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यहां कहा कि कुशल व प्रभावी वैज्ञानिक उद्यम के लिए मितव्ययी नवाचार और क्राउडसोर्सिग के अलावा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर सबसे ज्यादा जोर देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “नवाचार हमारे विज्ञान का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि नवाचार वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से संचालित होना चाहिए। यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र और अकादमिक संस्थानों की भी यह जिम्मेदारी है।”

मोदी ने मैसूर विश्वविद्यालय में 103वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए ये बातें कही।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सुशासन केवल नीति बनाने, फैसले लेने, पारदर्शिता और जबावदेही नहीं होती, बल्कि इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी को शामिल कर विकल्प पेश करने और रणनीति तैयार करने की व्यवस्था है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल नेटवर्क का दायरा बढ़ने से गरीबों की पहुंच सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक सुविधाओं तक बढ़ी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष संगोष्ठी में 170 आवेदनों की पहचान की थी, जो शासन, विकास और संरक्षण के विभिन्न पहलुओं से संबंधित है।

उन्होंने कहा, “हमने अपने लोगों की महत्वाकांक्षा के स्तर को बढ़ाया है और उसी अनुपात में हमें अपने प्रयास के पैमानों में वृद्धि करनी होगी। हम स्टार्ट-अप इंडिया की शुरुआत (16 जनवरी को) करने जा रहे हैं, ताकि नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिले। इसके अलावा हम शैक्षणिक संस्थाओं में प्रौद्योगिकी केंद्र की स्थापना करने जा रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने विज्ञान व तकनीक मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे सरकारी विभागों में वैज्ञानिक विभागों और संस्थानों का ढांचा तैयार करने की रूपरेखा तैयार करें। उन्होंने कहा कि वे सरकारी संघवाद की पहल के तहत केंद्र और राज्य के संस्थाओं और एजेंसियों के बीच वृहद वैज्ञानिक सामंजस्य को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे विज्ञान के लिए संसाधनों में वृद्धि करेंगे और रणनीतिक प्राथमिकताओं के हिसाब से उसे प्रसारित करेंगे। उन्होंने कहा कि देश में विज्ञान और शोध को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान प्रशासन में सुधार किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा, “संसाधनों की कमी और दावों में प्रतिस्पर्धा वाली इस दुनिया में हमें अपनी प्राथमिकताओं को चतुराई से परिभाषित करना होगा। यह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जहां चुनौतियां बहुत सारी है और पैमाना बहुत व्यापक है- स्वास्थ्य से लेकर भूख तक और ऊर्जा से लेकर अर्थव्यवस्था तक।”

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