मुंबई, 4 जनवरी (आईएएनएस)। अभिनेता-निर्देशक संजय सूरी का कहना है कि विभिन्न फिल्मोत्सवों में दिखाई जाने वाली फिल्में कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती हैं।
संजय सूरी की फिल्म ‘चौरंगा’ की देश व विदेश के फिल्मोत्सवों में सराहना हुई है। उनकी यह फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
संजय ने अपना करियर ऑफबीट फिल्मों के साथ शुरू किया, लेकिन उनका मानना है कि फिल्मोत्सवों की फिल्मों के प्रति मानसिकता में बदलाव हो रहा है।
ओनिर के साथ ‘चौरंगा’ का निर्माण करने वाले सूरी ने कहा, “कुछ लोग मानते हैं कि ये फिल्मोत्सव की फिल्में हैं, इसलिए इन्हें नहीं देखते। लेकिन ये फिल्में वास्तव में कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। ये अलग तरह की फिल्में होती हैं, जिन्हें परिपक्व दर्शक पसंद करते हैं।”
उन्होंने कहा, “फिल्मोत्सवों में फिल्में दिखाए जाने भर से उनकी सफलता या असफलता तय नहीं हो जाती, लेकिन यदि इन्हें सराहना मिलती है तो इनके आगे भी सफल होने की उम्मीद होती है।”
फिल्म ‘चौरंगा’ में संजय, तनिष्ठा चटर्जी और अंशुमान झा मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म ग्रामीण जीवन में वर्ग उत्पीड़न की हिंसा पर आधारित है।
सूरी ने बताया कि वह खुद भी भेदभाव के शिकार हुए हैं।
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