कोलकाता, 7 जनवरी (आईएएनएस)। अल्बम ‘भक्ति विदाउट बॉर्डर्स’ से चर्चित और ग्रेमी अवार्ड के लिए नामांकित मशहूर जर्मन गायक मादी दास का मानना है कि भजन व भक्ति संबंधित गीतों को एक महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में पहचान मिलनी चाहिए। आठ वर्षो तक भारत में कीर्तन व भजन की शिक्षा ले चुके दास ने कहा कि ‘हमें अपनी परंपराओं को सही स्थान देने की जरूरत है।’
कोलकाता, 7 जनवरी (आईएएनएस)। अल्बम ‘भक्ति विदाउट बॉर्डर्स’ से चर्चित और ग्रेमी अवार्ड के लिए नामांकित मशहूर जर्मन गायक मादी दास का मानना है कि भजन व भक्ति संबंधित गीतों को एक महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में पहचान मिलनी चाहिए। आठ वर्षो तक भारत में कीर्तन व भजन की शिक्षा ले चुके दास ने कहा कि ‘हमें अपनी परंपराओं को सही स्थान देने की जरूरत है।’
दास हॉलीवुड इंटरटेनमेंट एग्जिक्यूटिव रह चुके हैं। वर्तमान में वह ऑस्ट्रेलियन फिल्म व टीवी इंडस्ट्री के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा, “टेलर स्विफ्ट व अन्य कलाकारों के साथ मेरे अल्बम को नामांकित किया जाना पूरी तरह आश्चर्यजनक है। इस संगीत का इतिहास पॉप या आरएंडबी से कहीं पुराना है। यह संगीत लगभग सदियों से चलता आ रहा है, तो क्या यह समय अब इसे एक समृद्ध व महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में पहचान देने का नहीं आ गया है?”
भक्ति योग की वैष्णव परंपरा में पले व बढ़े दास की ‘भक्ति विदाउट बॉर्डर्स’ डेब्यू अल्बम है।
मादी दास के अलावा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका टेलर स्विफ्ट, रैपर केंड्रिक लेमर आदि को भी इस श्रेणी में ग्रेमी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया है।
अगले माह घोषित होने वाले 58वें ग्रेमी अवॉर्ड के लिए दास के अल्बम नॉन क्रिश्चियन धार्मिक संगीत की श्रेणी में नामांकित की गई है। यह तीसरी बार है, जब कीर्तन संबंधित संगीत को ग्रेमी अवॉर्ड में जगह दी गई है। हालांकि यह संगीत एक बार भी अवॉर्ड नहीं जीत पाई है।
इस अल्बम में 11 भजन हैं, जिसे मशहूर कीर्तन कलाकार दवे स्ट्रिंगर ने बनाया है। दास ने हर कीर्तन अलग-अलग महिला गायकों के साथ गाया है।
ई-मेल के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से आइएएनएस को दिए इंटरव्यू में मादी दास ने कहा, “मेरा संगीत हिंदू धार्मिक पृष्ठिभूमि से निकला है, जो ईसा चरित के समतुल्य है।”
जर्मनी में पैदा हुए दास की मां अमेरिकी हैं, जबकि पिता जर्मनी से ताल्लुक रखते हैं, जिसके चलते उन्हें अलग-अगल तरह के संगीत की शैली सीखने को मिली।
सात साल की उम्र में दास भारत आ गए थे। उन्होंने आठ साल तक वृंदावन व मायापुर में बोर्डिग स्कूल में पढ़ाई की और भजन व कीर्तन सीखा। वे बेहद साफ व अच्छी हिन्दी बोल लेते हैं। इसके बाद वे आयरलैंड चले गए, जहां उन्होंने सेल्टिक संगीत सीखा। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के फिल्म स्कूल में शिक्षा ली।
उन्होंने कहा कि उनके अल्बम में भारतीय व आइरिश म्यूजिक की छाप है। इन दिनों अमेरिका में भी कीर्तन संगीत की और लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। वहां भक्ति फेस्टिवल व रेडियो शो में भी अब भक्ति गाने सुने जा रहे हैं।
dharmpath.com dharmpath