रायपुर, 8 जनवरी (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान ‘जन्म सहयोगी (प्रसव संगी)’ के रूप में प्रसूति कक्ष में एक महिला परिजन को साथ रखने की अभिनव पहल शुरू की जा रही है। प्रसव संगी नाम से यह कार्यक्रम गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी को प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में शुरू किया जाएगा।
प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व सिविल सर्जन को पत्र प्रेषित कर इस आशय के निर्देश दिए जा चुके हैं।
संचालक (स्वास्थ्य सेवाएं) आर. प्रसन्ना ने शुक्रवार को बताया कि सभी शासकीय जिला अस्पतालों और शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रसव संगी कार्यक्रम का क्रियान्वयन शुरू की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा गर्भवती महिलाओं के प्रसवपीड़ा को ध्यान में रखते हुए शासकीय अस्पतालों में जन्म सहयोगी (प्रसव संगी) कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक प्रसूता महिला को प्रसव के दौरान प्रसूति कक्ष में एक महिला परिजन को साथ में रखने की अनुमति होगी। यह अनुमति सामान्य प्रसव में ही दिया जाएगा। सिजेरियन प्रसव एवं अन्य प्रकरणों में अनुमति नहीं होगी। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रसवकाल में प्रसूता माता के परिवार को भागीदारी का अवसर देना तथा प्रसूता का प्रसव पूर्व, प्रसवकालीन एवं प्रसवोत्तर अवधि के दौरान बेहतर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति बनाए रखना है।
प्रसव संगी का लाभ प्रसव की समयावधि में अपेक्षित कमी, भावनात्मक तनाव में कमी के कारण प्रसव पीड़ा में कमीए प्रसवकालीन दवाइयों एवं प्रक्रिया की आवश्यकताओं में कमी, गंभीर प्रसव के प्रकरणों में कमी, प्रसव के बाद उत्पन्न समस्याओं में कमी, परिजनों का चिकित्सालय के कर्मियों को सहयोग प्राप्त होना, संस्थागत प्रसव की संख्या में वृद्धि तथा माता मृत्यु दर में कमी लाना है।
प्रसन्ना ने बताया कि प्रसव संगी की पात्रता के लिए जरूरी है कि ऐसी महिला जो स्वयं कभी प्रसूता रही हो, किसी भी संक्रामक रोग से ग्रसित न हो, साफ-सुथरे कपड़े पहनती हो, प्रसव की प्रक्रिया के दौरान गर्भवती महिला के साथ रहने को तैयार हो। प्रसव संगी के रूप में गर्भवती महिला की मां, सास या बड़ी बहन जो पहले प्रसूता रही हो, को प्राथमिकता मिलेगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली ने बताया कि जन्म सहयोगी (प्रसव संगी) की भूमिका गर्भवती को भावनात्मक समर्थन, निरंतर दिलासा देते रहना, आरामदायक स्पर्श, मसाज, पर्याप्त तरल पदार्थो का सेवन कराना, गर्भवती या प्रसूता की इच्छाओं को दूसरे के सामने स्पष्ट करना, प्रसव प्रगति के बारे में परिजनों को अवगत कराना तथा ड्यूटी नर्स की सलाह एवं निर्देशों का पालन करना है।
प्रसव संगी के लिए एक आवेदनपत्र भरकर देना अनिवार्य होगा, जिसमें प्रसूता की सहमति, जन्म सहयोगी के हस्ताक्षर तथा चिकित्सालय द्वारा चिकित्सा अधिकारी या अधिकृत स्टॉफ नर्स के स्वीकृति हस्ताक्षर होने के बाद ही अनुमति दी जाएगी।
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