कोलकाता, 9 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि मालदा जिले में हुई हिंसा कोई धार्मिक दंगा नहीं था, बल्कि स्थानीय निवासियों और बीएसएफ कर्मियों के बीच हुई झड़प का नतीजा था।
बनर्जी ने दोदिवसीय बंगाल वैश्विक व्यापार सम्मेलन के दौरान मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि घटना के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर गलत सूचनाएं फैलाई जा रही है। यह बीएसएफ और स्थानीय निवासियों के बीच की घटना है और राज्य सरकार इसमें कहीं भी शामिल नहीं है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने बनर्जी के दावे को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री पर ही गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया है।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने आईएएनएस को बताया, “मुख्यमंत्री भ्रामक बातें कहकर जिम्मेदारियों से भागने की कोशिश कर रही है। अगर यह बीएसएफ जवानों और स्थानीय निवासियों के बीच झड़प थी तो कालियाचक थाने पर क्यों हमला किया गया और पुलिस के 11 से ज्यादा वाहनों में क्यों तोड़फोड़ की गई।”
सिन्हा ने दावा किया कि इस घटना की आड़ में सत्ताधारी त्रिणमूल कांग्रेस पार्टी अपने लोगों के राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के सबूतों को मिटाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र में गाय की तस्करी, घुसपैठ और नकली नोट की तस्करी धड़ल्ले से होती है। उन मामलों की फाइल कालियाचक थाने में थी, जिसे दंगे की आड़ में जला दिया गया।
उन्होंने कहा कि जब से राष्ट्रीय जांच आयोग पठानकोट वायु सैनिक अड्डे की जांच में जुटा है तब से त्रिणमूल को खतरा पैदा हो गया है कि जांच की चपेट में उसके कार्यकर्ता और नेता भी आ सकते हैं। इसलिए योजनागत तरीके से इन सारी घटनाओं को अंजाम दिया गया, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें।
इस घटना के बाद वहां गृहमंत्री राजनाथ सिंह के दौरा करने की बात थी, लेकिन सिन्हा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यक्रम पहले से तय है, इसलिए वे वहां नहीं जा पाएंगे।
हालांकि केंद्रीय मंत्री पार्टी और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के 18 जनवरी को मालदा में एक रैली को संबोधित करने की उम्मीद है।
पुलिस ने मालदा में अब तक 10 दंगाइयों को हिरासत में लिया है। उन पर आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे कई आरोप लगाए गए हैं।
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