चीन की विकास दर गत वर्ष 6.9 फीसदी रही, जो गत 25 वर्षो का निचला स्तर है। कई विदेशी मीडिया रपटों में इसे चीन की भावी आर्थिक गिरावट की झांकी के रूप में पेश किया जा रहा है। चीन के उपभोक्ताओं में हालांकि इस गिरावट की झलक नहीं मिल रही है।
नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के चाइना इकॉनॉमिक मॉनीटरिंग एंड एनालिसिस सेंटर के उप प्रमुख पान जियांचेंग ने कहा, “यदि आप इस्पात संयंत्रों और कोयला खदानों में जा कर देखेंगे, तो समझेंगे कि चीन की आर्थिक कहानी खत्म ही होने वाली है। वहीं यदि आप चीन के सिलिकॉन वैली ‘झोंगुआनकुन’ में मौजूद नवाचार केंद्रों या दर्शकों से खचाखच भरे सिनेमाघरों में जाएंगे, तो आपको लगेगा कि तस्वीर अभी बाकी है।”
पान ने कहा कि चीन अब निवेश नहीं, बल्कि खपत पर जोर दे रहा है। इसलिए अन्य प्रकार के क्षेत्रों में विकास बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
बिजली खपत, रेलवे माल ढुलाई, बैंकिंग ऋण और पीएमआई के मौजूदा आर्थिक संकेतों से विनिर्माण जैसे निवेश आधारित उद्योगों के विकास का पता चलता है।
अमेरिकी निवेश कंपनी जेफरीज ग्रुप की एक रपट के मुताबिक, दुनिया को हालांकि खपत और सेवा क्षेत्र पर ध्यान देना चाहिए।
जेफरीज ग्रुप की चीन की शाखा के प्रबंध निदेशक यू ली ने कहा, “चीन की आर्थिक संरचना बदल रही है।”
2015 के प्रथम 11 महीनों में 18.2 अरब पार्सलों की डिलीवरी हुई, जो साल-दर-साल आधार पर 48 फीसदी अधिक है। कूरियर सेवा कंपनियों की आय भी इस दौरान 34 फीसदी अधिक 245.6 अरब युआन (37.5 अरब डॉलर) रही। इससे ई-कॉमर्स और घरेलू खपत में तेजी का पता चलता है।
सिनेमा घरों की कमाई भी 2015 में 48 फीसदी अधिक 44 अरब युआन रही।
उद्यमिता और नवाचार पर अधिक जोर दिए जाने से चीन का कारोबार माहौल सूचकांक ऊपर की ओर बढ़ रहा है, जिसका निर्माण सर्च इंजन बैदू ने बिग डाटा के आधार पर किया है।
जेफरीज ग्रुप के मुताबिक, चीन की अर्थव्यवस्था को एक नए सूचकांक की जरूरत है, जिसमें एक्सप्रेस डिलीवरी, एटीएम नकद निकासी, सिनेमा बॉक्स ऑफिस की आय और घरेलू विमानन कंपनियों की उड़ानों की तय की गई दूरी को शामिल किया जाए, क्योंकि ये ई-कॉमर्स, मनोरंजन और पर्यटन कारोबार की परिस्थितियों को दर्शाती हैं।
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