नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। बीते कुछ वर्षो में राजपथ पर देश के गणतंत्र दिवस की परेड में सैन्य शक्ति व विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत की मिली-जुली झलक देखने को मिली है। मंगलवार को 67वें गणतंत्र दिवस की परेड में भी कुछ यही देखने को मिला हालांकि यह कुछ हद तक कारोबार के कलेवर में नजर आई।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। बीते कुछ वर्षो में राजपथ पर देश के गणतंत्र दिवस की परेड में सैन्य शक्ति व विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत की मिली-जुली झलक देखने को मिली है। मंगलवार को 67वें गणतंत्र दिवस की परेड में भी कुछ यही देखने को मिला हालांकि यह कुछ हद तक कारोबार के कलेवर में नजर आई।
परेड में पहली बार फ्रांस की 35वीं इंफेंट्री रेजीमेंट को मार्चिग दल को अगुवाई करने का सम्मान दिया गया।
सैन्य शक्ति का प्रदर्शन बिना तड़क-भड़क वाला रहा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राजपथ पर परेड की सलामी ली। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद देश के मुख्य अतिथि रहे।
परेड में पहली बार फ्रांस की 35वीं इंफेंट्री रेजीमेंट को मार्चिग दल को अगुवाई करने का सम्मान दिया गया। इस रेजीमेंट के लोगों ने 1781-48 में भारत में अपनी सेवा दी थी।
गणतंत्र दिवस के जश्न का आगाज इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि व पुष्पांजलि अर्पित करने से हुआ। मोदी ने भूरे रंग का बंदगला सूट और भगवा रंग की गुजराती पगड़ी पहनी हुई थी।
इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और फ्रांस्वा ओलांद का रुख किया।
राष्ट्रपति के अंगरक्षकों ने राष्ट्रीय सलामी दी और उसके बाद तिरंगा फहराया गया व राष्ट्रगान बजाया गया। इसके बाद राष्ट्रपति ने शहीद लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी की पत्नी को देश के सबसे बड़े वीरता सम्मान अशोक चक्र(मरणोपरांत) से सम्मानित किया। गोस्वामी पिछले साल सितंबर में जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों के साथ हुई एक मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
गोस्वामी की पत्नी को अशोक चक्र सौंपते समय प्रणब मुखर्जी के चेहरे पर उनके प्रति दुख साफ झलक रहा था।
इस बार परेड में खोजी कुत्तों के साथ सैन्य दस्ता करीब 26 साल बाद देखा गया। वहीं, परंपरा से उलट राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की झांकी की एंट्री भी लगभग परेड समाप्ति के करीब हुई। उसके बाद बच्चों की झांकी, कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स के जांबाज मोटरसाइकिल सवारों, सेनानियों का भव्य हवाई प्रदर्शन और भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों का गड़गड़ाते हुए आगे बढ़ना सबका दिल जीत ले गया।
झांकियां निकलते समय जय भारती, गैलेक्सी राइर्ड्स, देश हमारा अनमोल है, विजय भारत, देशों का सरताज भारत, कदम कदम बढ़ाए जा और असम राइफल्स का सिपाही देश की शान बढ़ाए जैसे गीत साफ-साफ सुनाई पड़ रहे थे।
इस बार परेड में परंपरा से उलट भी कई चीजें देखने को मिलीं। इस बार परेड में खोजी कुत्तों के साथ सैन्य दस्ता करीब 26 साल बाद देखा गया। वहीं, परंपरा से उलट राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की झांकी की एंट्री भी लगभग परेड समाप्ति के करीब हुई। उसके बाद बच्चों की झांकी, कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स के जांबाज मोटरसाइकिल सवारों, सेनानियों का भव्य हवाई प्रदर्शन और भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों का गड़गड़ाते हुए आगे बढ़ना सबका दिल जीत ले गया।
उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, तीनों सेनाओं के प्रमुख, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कैबिनेट मंत्री, गणमान्य लोग और उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं का समूह परेड का साक्षी बना।
आतंकवादी धमकी के मद्देनजर परेड की सुरक्षा में 5,000 पुलिसकर्मी, 15,000 पैरा ट्रपर्स, विमान भेदी तोपें और करीब 1,000 बंदूकधारी सहित अन्य सुरक्षाबल तैनात थे।
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