नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को सीरियल किलर चंद्रकांत झा की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति आर.के. गौबा की खंडपीठ ने मौत की सजा को कम कर उम्रकैद में बदलते हुए कहा कि इस मामले में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। इसके बावजूद दोषी को बिना किसी छूट के आजीवन कैद की सजा दी जाती है।
झा बिहार के मधेपुरा का निवासी है, जिसे 2013 में हत्या के दो मामलों में मौत की सजा दी गई थी, जबकि एक मामले में उम्रकैद की सजा दी गई थी।
झा ने 2006 में अनिल मंडल का खून किया था। उसके बाद उसने 2007 में 19 वर्षीय उपेंद्र और एक दूसरे व्यक्ति दिलीप की हत्या की थी।
पुलिस के मुताबिक, झा हत्या के बाद मृतक के शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर फेंकता था और धड़ वाले हिस्से को तिहाड़ जेल के बाहर फेंकता था।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि उसने पुलिस को पत्र लिखकर पकड़ने की चुनौती दी थी और उसमें लिखा था कि हर 15 दिन में वह ऐसे ही उपहार (शव) देता रहेगा। दिल्ली पुलिस ने झा को 20 मई 2007 को मियांवली नगर के पास से गिरफ्तार किया था।
dharmpath.com dharmpath