नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने मंत्रियों स्मृति ईरानी और बंडारू दत्तात्रेय को बर्खास्त करने की मांग की है। पार्टी ने इन मंत्रियों को हैदराबाद में दलित शोधछात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए यह मांग की है।
माकपा ने अपने मुखपत्र ‘पीपल्स डेमोक्रेसी’ के संपादकीय में यह भी कहा है कि 17 जनवरी को रोहित वेमुला की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुलपति पी. अप्पा राव को भी बर्खास्त किया जाए।
इसमें कहा गया है कि कुलपति को तत्काल हटाया जाए। साथ ही दत्तात्रेय और कुलपति दोनों पर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया जाए।
“प्रधानमंत्री को यह समझना चाहिए कि उनकी सरकार अगर शासन करने के नैतिक अधिकार को बचाना चाहती है तो उसे दत्तात्रेय और ईरानी को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर देना चाहिए।”
मुखपत्र में कहा गया है कि ऐसा भी हुआ है, जब किसी एक घटना के कारण सरकार का नैतिक अधिकार खत्म हो गया हो और शोध छात्र वेमुला की मौत, जिसे आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया गया, ऐसी ही एक घटना है।
26 वर्षीय वेमुला और अन्य चार दलित छात्रों को विश्वविद्यालय से केंद्रीय श्रममंत्री बंडारू दत्तात्रेय द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। बंडारू सिंकदराबाद से सांसद हैं।
संपादकीय में लिखा गया है कि पहले की जांच में अंबेडकर स्टूडेंड एसोसिएशन से जुड़े पांच दलित छात्रों पर किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी गई थी। लेकिन दत्तात्रेय द्वारा स्मृति को लिखे पत्र के बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय जातिवादी, उग्रवादी और राष्ट्र विरोधियों की मांद बन गया। इसके बाद कुलपति के नेतृत्व में पांच दलित छात्रों पर कार्रवाई की गई।
“शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों को चार पत्र भेज कर पूछा कि दत्तात्रेय के पत्र में लिखे मुद्दों के आधार पर क्या कार्रवाई की गई।”
“विश्वविद्यालय द्वारा बर्खास्त किए जाने के कारण वेमुला और उसके चार अन्य साथी छात्रावास व अन्य सुविधाओं के प्रयोग से रोक दिए गए, जिसका नतीजा रोहित की आत्महत्या के रूप में सामने आया। इसलिए इस मामले में सीधे तौर पर दत्तात्रेय और ईरानी की भूमिका है।”
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