अधिसूचना के अनुसार, कुम्हार अब साधारण मिट्टी या बालू का उपयोग मिट्टी के घड़े, लैम्प तथा खिलौना आदि निर्माण के लिए खनन कर सकेंगे। इसी तरह मिट्टी की टाइल्स बनाने वाले लोगों और किसानों को भी बाढ़ के पश्चात कृषि भूमि से बालू के जमाव को हटाने के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक नहीं है। इसके तहत ग्राम पंचायतों में स्थित स्रोतों से बालू और साधारण मिट्टी को व्यक्तिगत उपयोग या सामुदायिक कार्य के लिए किया जा सकेगा।
ग्राम पंचायतें खनन, सामुदायिक कार्य- जैसे तालाबों और टैंको से गाद हटाना तथा मनरेगा व अन्य सरकारी योजनाओं के तहत ग्रामीण सड़कों, तालाबों, बांधों का निर्माण, मेड़ों, बैराजों, कुआं निर्माण, भवनों की खुदाई के लिए नींव निर्माण, नदी-नहर मरम्मत के प्रयोजन के लिए पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होगी।
अधिसूचना के अनुसार, पांच हेक्टेयर तक लघु खनिजों के खनन और पट्टे के लिए पर्यावरण की अनापत्ति अब संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा जारी की जाएगी। इसके लिए जिलास्तरीय पर्यावरण संघात निर्धारण प्राधिकरण का गठन किया गया है। अब इसके लिए रायपुर स्थित बोर्ड मुख्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसका सीधा लाभ दूर-दराज के लोगों को मिलेगा।
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