लखनऊ, 1 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई ने कहा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव केंद्र सरकार पर तंज कसने की बजाय अपनी मशीनरी को स्मार्ट करें। भाजपा ने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के प्रथम चरण में उप्र के किसी शहर का न चुना जाना सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जब प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिए एजेंसियांे से जरूरी मद में लेकर दो करोड़ रुपये डीपीआर बनाए जाने की व्यवस्था थी तो संतुलित खाका क्यों नहीं पेश किया जा सका।
उन्होंने कहा कि मजहबी आधार पर मजारों का विकास करती अखिलेश सरकार विकास की पारदर्शी प्रक्रिया में मशीनरी को क्यों नहीं स्मार्ट बनाना चाहती है। उप्र सरकार ने स्मार्ट सिटी योनजा में गंभीरता से पहल नहीं की, और अब राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है।
ज्ञात हो कि भाजपा ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा है कि भाजपा वाले स्मार्ट निकले। उन्होंने एक भी स्मार्ट सिटी उप्र को नहीं दी है।
पाठक ने कहा कि देश में पहली बार विभिन्न स्तरों पर कड़ी प्रतियोगिता के आधार पर विकास और निवेश के लिए शहरों का चुनाव हुआ। शहरों के बीच खुली प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, पूरी पारर्दिशता बरती गई। 20 शहरों के चुनाव मंे न तो कोई राजनीतिक हस्तक्षेप था, नहीं ही केंद्र सरकार की कोई भूमिका।
उन्होंने कहा क्या मुख्यमंत्री नहीं जानते है कि स्मार्ट सिटी के चयन के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई, फिर उस प्रक्रिया के तहत चयनित शहरों में उप्र के शहर नहीं आ पाए। क्या खुद मुख्यमंत्री ने यह जानने का प्रयास किया कि कहां चूक हुई।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी की पहली सूची में सर्वाधिक 71 सांसद चुनकर लोकसभा में भेजने वाले उत्तर प्रदेश के किसी शहर को शामिल नहीं किया है। केंद्र ने बिहार को भी सूची से अलग रखा है, लेकिन खूनी व्यापम घोटाले के लिए चर्चित मध्यप्रदेश के तीन शहरों को सूची में जगह दी है, क्योंकि वहां भाजपा का शासन है।
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