कोझिकोड (केरल), 2 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि आयुर्वेद स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी समग्र एवं व्यापक पहुंच के चलते दुनियाभर में प्रासंगिक है।
मोदी ने यहां चल रहे वैश्विक आयुर्वेद महोत्सव में कहा, “आयुर्वेद स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी समग्र व व्यापक पहुंच की वजह से आज दुनियाभर में प्रासंगिक है। आयुर्वेदिक दिनचर्या व्यक्ति के जीवन में शांति व तारतम्य लाने में मदद करती है। नित्य आयुर्वेदिक दिनचर्या का मतलब मानवजाति के मानसिक व शारीरिक दोनों स्वास्थ्य में सुधार करना है।”
उन्होंने कहा कि गैर-संक्रामक के साथ ही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर आज पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन गए हैं।
मोदी ने कहा कि इलाज के बढ़ते खर्च और एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभावों ने चिकित्सा विशेषज्ञों को उपचार की पारंपरिक प्रणालियों के विस्तार के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
मोदी ने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि हर साल गैर-संक्रामक बीमारियों से 3.8 करोड़ लोगों की जान जाती है और करीब 2.8 करोड़ मौतें अल्प और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। आयुर्वेद समाधान उपलब्ध कराता है।”
उन्होंने कहा कि भारत में लंबी ऋषि-मुनि परंपरा रही है, जिन्होंने स्वास्थ्य देखभाल के लिए आयुर्वेद, योग और सिद्धा जैसी स्वदेशी प्रणालियां विकसित कीं।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार आयुर्वेद और चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देने को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद आयुष विभाग में सुधार कर उसे केंद्रीय मंत्रालय का दर्जा दिया गया और आयुष चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन शुरू किया गया।
मोदी ने कहा, “हम अनुसंधान एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के उचित समाकलन, स्वास्थ्य प्रणाली में प्रैक्टिस व चिकित्सकों के नियमन के जरिए हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में पारंपरिक दवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
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