नासा का नया रॉकेट अपने संग 13 छोटे उपग्रह ले जाएगा

एक रिपोर्ट के अनुसार, एसएलएस के पहले मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन रॉकेट की एकीकृत प्रणाली के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है जिससे बाद मानव मिशन के लिए भी रास्ता खुल सकें।

नासा के एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डेवलपमेंट के उपसहायक बिल हिल ने एक बयान में कहा, “एसएलएस ने विज्ञान के महत्वपूर्ण परीक्षणों का एक असाधारण अवसर प्रदान किया है। इसके साथ ही हम पृथ्वी की कक्षा से परे महत्वपूर्ण तकनीकों की जांच कर पा रहे हैं।”

हिल ने बताया, “इस रॉकेट के पास ओरियन भेजने के साथ ही 13 छोटे उपग्रह को भेजने की अभूतपूर्व शक्ति है।”

अपनी पहली उड़ान के लिए एसएलएस रॉकेट की 77 टन का वजन ढोने की क्षमता निर्धारित की गई है लेकिन वास्तव में यह 143 टन वजन ढोने की अभूतपूर्व क्षमता रखता है।

नासा ने कहा कि ‘क्यूबसैट्स’ नाम से जाने जाने वाले छोटे उपग्रह गहरे अंतरिक्ष में सेकंडरी पेलोड के तौर पर कार्य करेंगे। इससे भविष्य में गहरे अंतरिक्ष मिशन में मानव अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त होगा।

इन 13 उपग्रहों में से चार चांद का अध्ययन करेंगे। यह बर्फीले पानी, हाइड्रोजन और आसपास के अंतरिक्ष में अन्य संपदा की खोज करेंगे।

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