इंफाल, 5 फरवरी (आईएएनएस)। मणिपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार मध्य रात्रि से शुरू हुई 48 घंटे की नाकाबंदी से राज्य में जनजीवन प्रभावित हुआ है। नाकाबंदी का आह्वान युनाइटेड नागा कौंसिल (यूएनसी) ने किया है।
नाकाबंदी का आह्वान मणिपुर विधानसभा द्वारा बीते वर्ष 31 अगस्त को जारी तीन ‘आदिवासी विरोधी विधेयकों’ और इनके खिलाफ प्रदर्शन में नौ आदिवासियों को मारे जाने के विरोध में किया गया है। इन नौ लोगों के शव अभी भी शवगृह में रखे हुए हैं।
नाकाबंदी को जेलिआंगरोंग युवा मंच का भी समर्थन हासिल है, जो केंद्र सरकार और नागा संगठनों की वार्ता का विरोधी है।
कुकी छात्र संगठन (केएसओ) और आल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (एएनएसएएम) ने पहली फरवरी की अर्ध रात्रि से राजमार्गो की नाकाबंदी का आह्वान किया था। लेकिन, इन्होंने अपना आह्वान सरकार के इस आश्वासन पर 10 दिनों के लिए वापस ले लिया कि संविदा पर रखे गए शिक्षकों को नियमित करने की इनकी मांग पर विचार किया जाएगा।
इस बात की संभावना है कि नाकाबंदी की वजह से छह फरवरी को नागरिक संगठनों द्वारा चार जिलों में बुलाई गई रैली प्रभावित हो सकती है।
रैली आयोजन समिति के संयोजक एलंगबाम जानसन ने बताया कि रैली मूल निवासियों के समर्थन में की जा रही है।
रैली में बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के खास इंतजाम किए हैं।
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