डॉ. सिंह ने रायपुर में जारी शोक संदेश में कहा कि वर्ष 1998 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और वर्ष 2013 में पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित निदा फाजली मानवता और सामाजिक समरसता के कवि थे। उनके निधन से देश ने गंगा-जमुनी संस्कृति और सामाजिक सद्भावना के एक महान कवि को हमेशा के लिए खो दिया है।
उन्होंने कहा कि निदा फाजली ने हिंदी और उर्दू दोनों ही भाषाओं में मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण अपनी रचनाओं के जरिये देश और दुनिया को सही दिशा देने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निदा ने कालजयी गजलें लिखी हैं। इसके अलावा हिंदी फिल्मों में भी उनके लिखे गीतों और गजलों को अपार लोकप्रियता मिली। मुख्यमंत्री ने निदा फाजली के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति प्रकट की है।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। ज्ञातव्य है कि साहित्य जगत में निदा फाजली के नाम से लोकप्रिय मुक्तदा हसन का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उन्हें उनके काव्य संग्रह ‘खोया हुआ सा कुछ’ के लिए वर्ष 1998 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। निदा ने कई हिंदी फिल्मों में भी गीत लिखे, जिनमें ‘रजिया सुल्तान’, ‘आहिस्ता-आहिस्ता’ आदि शामिल हैं।
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