विशाल गुलाटी
विशाल गुलाटी
पोंग बांध (हिमाचल प्रदेश), 9 फरवरी (आईएएनएस)। कम ठंड पड़ने से हिमाचल की मनोरम कांगड़ा घाटी में स्थित पोंग बांध के ‘वेटलैंड’ में इस साल प्रवासी पक्षियों की कम प्रजातियां देखने को मिलीं।
वन्यजीव अधिकारियों के मुताबिक, पिछले सप्ताह प्रदेश वन्य जीव शाखा द्वारा किये गए सर्वेक्षण के मुताबिक इस साल गत साल की तुलना में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की संख्या 30000 कम पाई गई। पिछले साल 135000 पक्षी यहां आए थे जबकि 2014 में 119 प्रजातियों के 128000 जलपक्षी आए थे।
पोंग बांध के दलदली क्षेत्र में जाड़े के मौसम में हर साल 120000 से अधिक पक्षी आते हैं। लेकिन इस साल दो फरवरी से किए गए तीन दिवसीय सर्वेक्षण केदौरान 87 प्रजातियों के 105000 पक्षी ही देखे गए। पिछले साल 97 प्रजातियों के पक्षी आए थे।
पक्षियों की संख्या में आई कमी के बारे में सहायक वन संरक्षक (पोंग वेटलैंड) डी.एस.डडवाल ने आईएएनएस से कहा कि पक्षियों की संख्या में कमी मुख्यत: कम ठंड पड़ने की वजह से आई है। डडवाल भी पक्षियों की गणना से जुड़े थे। इस सर्वेक्षण में चंडीगढ़ पक्षी और हिमाचल पक्षी क्लब के पक्षीविदों के अलावा कई संस्थाओं के पक्षीविदों और स्वयं सेवकों ने भाग लिया।
एक खास तरह के पक्षी ‘बार-हेडेड’ हंस यहां बड़ी संख्या में आते रहे हैं। वे भी इस बार कम संख्या में आए। पिछले साल इनकी संख्या 71,800 थी जो इस साल घटकर 44000 हजार हो गई। वैसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के मुताबिक दुनिया भर में इस पक्षी की संख्या 130000 है और इनके अस्तित्व को खतरा माना जा रहा है।
‘बार-हेडेड’ हंस खासतौर से पोंग बांध के नंदपुर बटोली, नगरोटा सूर्यान, चट्टा और जामबल जलाशय से सटे दलदली क्षेत्र में देखे जाते हैं। इसके अलावा प्रवासी पक्षियों की अन्य प्रजातियां भी इस क्षेत्र में उतरती हैं, लेकिन उनकी संख्या कम होती है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 5 फरवरी शिमला में दशक का सबसे गर्म दिन रहा। अधिकतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया जो सामान्य 13 डिग्री अधिक था।
दरअसल जाड़े के मौसम में प्रचंड ठंड से बचने और भोजन की तलाश में प्रवासी जलपक्षी मध्य एशिया से हर साल पोंग बांध के वेटलैंड में आते हैं। पोंग दलदली क्षेत्र 307 वर्ग किलिोमीटर में फैला है जहां प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध रहता है। इसलिए यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए सदा से पसंदीदा जगह रहा है और वे हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर इस क्षेत्र में पड़ाव डालते हैं। इनमें जलकौआ, जलकाग, सारस, जलमुर्गी और हंस शामिल रहते हैं।
प्रवासी पक्षियों के अलावा स्थानीय पक्षियों की कई प्रजातियां भी पोंग दलदली क्षेत्र में बड़ी संख्या में देखी जाती हैं। मैना, कोयल, वनमुर्गा समेत कई प्रजाति के पक्षी देखे जाते हैं।
पोंग बांध वन्यजीव अभयारण्य के रिकार्ड के मुताबिक इस क्षेत्र में पक्षी की 423, सांप की 18, तितली की 90, स्तनधारी जीवों की 24 और मछलियों की 27 प्रजातियां पाई जाती हैं।
dharmpath.com dharmpath