मुंबई, 11 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जारी अपनी गवाही में खुलासा किया कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और इंटर सर्विज इंटेलीजेंस(आईएसआई) ने उसे ‘आतंकवादी फंड’ दिया था। इसका इस्तेमाल उसने भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में किया।
एलईटी का आतंकवादी हेडली इस वक्त अमेरिकी की जेल में बंद है। वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वहां से मुंबई की विशेष टाडा अदालत के न्यायाधीश जी.ए. सनाप के समक्ष गवाही दे रहा है। उसने गुरुवार को बताया कि उसे व उसके एलईटी सहयोगी तहव्वुर राणा को आतंकवादी फंड पाकिस्तान की आईएसआई के मेजर इकबाल और एलईटी के साजिद मीर ने दिया था। राणा इस वक्त अमेरिका की जेल में 14 साल की सजा काट रहा है।
बताया गया कि राणा को अक्टूबर 2006 में 67,605 रुपये की धनराशि दी गई थी और उसके बाद नवंबर 2006 में 500 डॉलर, नवंबर के आखिर में 17,636 रुपये और दिसंबर 2006 में 1,000 डॉलर दिए गए थे।
हेडली ने यह भी खुलासा किया कि भारत रवाना होने से पहले उसे 25,000 डॉलर दिए गए थे। इसके अलावा जनवरी 2008 में उसे साजिद मीर ने 40,000 (पाकिस्तानी) रुपये व मेजर इकबाल ने 2,000 रुपये (भारतीय मुद्रा) मिले थे। एलईटी के मेजर पाशा ने 80,000 रुपये जबकि मेजर इकबाल ने अतिरिक्त 1,500 रुपये दिए थे।
हेडली ने विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम को पूछताछ के दौरान बताया कि मेजर इकबाल ने उसे एक-दो मौके पर जाली नोट भी दिए थे।
उसने इससे पूर्व सुबह में, मुंबई की विशेष टाडा अदालत को बताया था कि भारत के सबसे बड़े बैंक-भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जून 2007 में उसके उस आवेदन को रद्द कर दिया था, जिसमें उसने मुंबई में एक बिजनेस अकाउंट खोलने की मंजूरी मांगी थी।
उसने बताया कि उसे एलईटी और आईएसआई दोनों ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पैसे दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल उसने भारत में अपने लिए काम-धंधा शुरू करने और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में किया।
उसने बताया कि इस पैसे से उसने दक्षिण मुंबई के ताड़देव इलाके में एक ऑफिस खोला और 12 अक्टूबर, 2006 में एक बिजनेस खाता खुलवाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक में आवेदन भी किया।
शिकागो में रहने वाले उसके वीजा सलाहकार रेमंड सैंर्ड्स ने आरबीआई में खाता खोलने से संबंधी औपचारिकताओं में उसकी मदद की, लेकिन आरबीआई ने एक जून, 2007 को उसका आवेदन निरस्त कर दिया।
हेडली ने भारत में कारोबार शुरू करने की उम्मीद से जनवरी, 2007 में मुंबई के ताड़देव ए/सी मार्केट में किराए पर एक ऑफिस लिया और मकान मालिक के नाम के तौर पर वोरा व मारू भरूचा का नाम लिखा, जो कि ऑफिस में उसके सेकेट्री थे। ऑफिस का प्रतिमाह का किराया 13,500 रुपये था।
हेडली ने यह काम सिर्फ इसलिए किया क्योंकि उसके आका काफी पहले से चाहते थे कि वह भारत में एक व्यवसाय की शुरुआत करे।
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