भारत अभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए तैयार नहीं

नई दिल्ली,11 फरवरी (आईएएनएस)। दुनिया के अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी संपन्न देश जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ रोजमर्रा की जिंदगी में मुहैया कराने की तैयारी कर चुके हैं, वहीं ऐसा लगता है कि भारत में अभी इस तकनीक को इस्तेमाल करने को लेकर हिचकिचाहट है।

नई दिल्ली,11 फरवरी (आईएएनएस)। दुनिया के अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी संपन्न देश जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ रोजमर्रा की जिंदगी में मुहैया कराने की तैयारी कर चुके हैं, वहीं ऐसा लगता है कि भारत में अभी इस तकनीक को इस्तेमाल करने को लेकर हिचकिचाहट है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशीयल इंटेलिजेंस (आईई) ऐसी तकनीक है जिसके इस्तेमाल से मशीनों को व्यावसायिक एवं घरेलू काम करवाए जा सकते हैं।

15 साल पहले गूगल से जुड़ने वाले भारतीय मूल के प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ अमित सिंघल ने इसी माह गूगल से इस्तीफा दे दिया और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ गए। उनका संदेश स्पष्ट है कि अब भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का ही होगा।

पूरी दुनिया में जहां इस समय मानव के समान बुद्धिमत्ता वाली मशीनें हासिल करने को लेकर हो हल्ला मचा हुआ है, सवाल उठता है कि क्या भारत इस बदलाव को स्वीकार करने के लिए तैयार है?

मार्केट रिसर्च एवं सलाहकार कंपनी ‘साइबर मीडिया रिसर्च’ (सीएमआर) के प्रमुख विश्लेषक फैसल कावूसा ने आईएएनएस से कहा, “भारतीय बाजार में हमें एआई 2020 तक एआई प्रौद्योगिकी के प्रवेश की उम्मीद है और 2025 तक इसमें पर्याप्त उन्नति हो जानी चाहिए।”

सीएमआर के एसबीयू प्रमुख थॉमस जार्ज के मुताबिक, “ऐसे कई अध्ययन सामने आए हैं जिनका आकलन है कि एआई पांच साल के अंदर मुख्य धारा में शामिल हो जाएगा। हालांकि, लगता है कि ऐसा भारत में नहीं, दुनिया के उन्नत एवं विकसित बाजार में ही संभव हो पाएगा।”

शोध एजेंसी ‘मार्केट्स एंड मार्केट्स’ की ताजा भविष्यवाणी के अनुसार, दुनिया भर में 2020 तक एआई का बाजार पांच अरब डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है।

अध्ययन में पाया गया है कि विज्ञापन, मीडिया और वित्तीय क्षेत्र में मशीनों के सीखने की तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और विभिन्न क्षेत्रों में एआई के बढ़ते उपयोग की वजह से एआई का बाजार बढ़ रहा है।

भारत में शीर्ष प्रौद्योगिकी कंपनियों को अभी एआई व्यवासाय में पर्याप्त प्रगति करना बाकी है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने एआई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने के लिए अपनी एक सहायक कंपनी ‘इग्नियो’ शुरू की है। इनफोसिस ने भी हाल ही में आइकीडो परियोजना शुरू की है जो पूरी तरह एआई पर केंद्रित होगी।

दूसरी ओर विप्रो ने एआई के क्षेत्र में संज्ञानात्मक कंप्यूटरों की एक सर्वसुविधा संपन्न अत्याधुनिक सहायक कंपनी ‘होम्स’ स्थापित कर रखा है। यह स्वचलित रोबोट और ड्रोन जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में एआई तकनीक पर शोध करने वाली एक संपूर्ण कंपनी है। एआई के सपने को पूरा करने के लिए विप्रो ने हाल ही में कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को की कंपनी विकारियस की हिस्सेदारी खरीदी है। विकारियस एक एआई कंपनी है।

जॉर्ज का कहना है कि इसके बावजूद देश में व्यापक पैमाने पर एआई को व्यावहार में लाने की बात करें तो यह सारे पहले पर्याप्त प्रतीत नहीं होते। हालांकि, उद्योग जगत में इस बारे में एक दशक से भी अधिक समय से बात हो रही है लेकिन अभी भारत में एआई को अपनी पहचान बनानी है।

वैश्विक स्तर पर माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और फेसबुक कार्यालयी काम-काज में एआई को अपनाने वाली अग्रणी कंपनियों में से हैं।

फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग चाहते हैं कि एआई पर अधिक ध्यान केंद्रित हो। वह तो अपने घर के रोजमर्रा के कामों और कार्यस्थल पर भी एआई का इस्तेमाल करने के बारे में सोच रहे हैं।

माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च के प्रबंध निदेशक क्रिस बिशप के अनुसार 2016 एआई का साल होगा।

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