धार, 12 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में शुक्रवार को वसंत पंचमी पर भोज उत्सव समिति ने पूजन और हवन नहीं किया, जबकि प्रशासन ने चुनिंदा मुसलमानों को गुपचुप तरीके से भोजशाला की छत पर ले जाकर नमाज अता कराई।
जिला जनसंपर्क अधिकारी श्रवण सिंह ने आईएएनएस से कहा कि भोज उत्सव समिति ने सुबह हवन-पूजन भोजशाला के बाहर किया, जबकि प्रशासन ने दोपहर में मुस्लिम समाज के लगभग 25 प्रतिनिधियों को भोजशाला के पिछले दरवाजे से ले जाकर छत पर लगे पंडाल में नमाज अता कराई।
जिले के प्रभारी मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी संवाददाताओं से बातचीत में नमाज अता कराए जाने की पुष्टि की है।
सिंह ने कहा कि वसंत पंचमी शुक्रवार को होने के कारण सुबह से ही भोजशाला के आसपास और धार शहर में तनाव के हालात बने हुए हैं। सुरक्षा बल की भारी तैनाती है।
इससे पहले प्रशासन और सरकार की कोशिशों के बीच हिंदू समाज के कुछ लोग हवन-पूजन की सामग्री लेकर सुबह भोजशाला के भीतर पहुंचे तो लगा कि यह मामला शांति से निपट जाएगा। लेकिन भोजशाला के भीतर पूजन, हवन शुरू होता, इससे पहले ही भोज उत्सव समिति के सदस्य बाहर आ गए।
समिति के अशोक जैन ने बाहर आकर कहा कि “भोजशाला के भीतर ऐसे लोग जमा हैं, जिनका इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है, लिहाजा अब वे बाहर ही पूजा करेंगे।” उसके बाद हिदू समाज के लोगों ने बाहर हवन-पूजन किया।
भोज उत्सव समिति ने आरोप लगाया कि “भोजशाला परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कई लोगों को हिंदुओं के भेष में खड़ा कर दिया गया है। हिंदू समाज के लोग भोजशाला में पूजा करने जाते हैं न कि युद्घ करने।” लिहाजा उन्होंने भोजशाला के बाहर ही हवन-पूजन किया।
बड़ी संख्या में लोग भोजशाला पहुंचे हैं, मगर अधिकांश लोगों ने भोजशाला के भीतर जाने के बजाय बाहर बने हवन कुंड में आहूति दी है। संभवत: यह पहला मौका है जब भोजशाला के बाहर पूजन-हवन हुआ है।
हिंदू संगठनों ने हवन-पूजन के बाद लालबाग चौराहे से शोभायात्रा निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू धर्मावलंबी शामिल हुए। शोभायात्रा विभिन्न मागरें से होती हुई भोजशाला पहुंची, जहां प्रशासन के रवैए के खिलाफ शंकराचार्य नरेंद्रानद गिरि धरने पर बैठ गए।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने वसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण पूजा और नमाज का समय तय किया था। तय कार्यक्रम के मुताबिक, सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक पूजा और अपराह्न् एक बजे से तीन बजे के बीच नमाज का समय निर्धारित था।
एएसआई के अनुसार, यहां हर मंगलवार और वसंत पंचमी के दिन पूजा होती है और हर शुक्रवार जुमे की नमाज अता की जाती है।
जिला प्रशासन के अनुसार, भोजशाला के आसपास और पूरे धार शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं। भोजशाला तक जाने के लिए भारी बैरिकेटिंग की गई है, जिसके कारण लोग कतार में ही भीतर जा सकते हैं। सुरक्षा में लगभग छह हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि धार एक ऐतिहासिक नगरी है। यहां राजा भोज ने 1010 से 1055 ईस्वी तक शासन किया था। उन्होंने 1034 में धार नगर में सरस्वती सदन की स्थापना की थी। बाद में इसे भोजशाला के नाम से पहचान मिला। यहां सरस्वती (वाग्देवी) की प्रतिमा स्थापित की गई थी। लेकिन वर्ष 1880 में एक अग्रेज इस प्रतिमा को अपने साथ लंदन उठा ले गया। वर्तमान में प्रतिमा लंदन में ही है।
एएसआई के अनुसार, भोजशाला को 1909 में संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया, और बाद में इसे पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया गया।
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा भोजशाला को मस्जिद बताए जाने पर धार स्टेट ने ही 1935 में परिसर में शुक्रवार को जुमे की नमाज अता करने की अनुमति दे दी। तभी से यह व्यवस्था चली आ रही है। कई बार विवाद बढ़ने पर कई वषरें के लिए नमाज और पूजा का दौर भी थमा रहा। वर्ष 2003 से पूजा और नमाज का सिलसिला चला आ रहा है।
तथ्यों के अनुसार, इस दौरान 2003, 2006 और 2013 में बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी तो विवाद हुआ। वर्ष 2003 में हिंसा भी हुई थी।
dharmpath.com dharmpath