चोरों के शिकार बने यात्री को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने शक के आधार पर अनाधिकृत रूप से सामान बेचने वाले एक युवक को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की और उसे झांसी जीआरपी के सुपुर्द कर दिया।
ट्रेन 19168 साबरमती एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस-9 के सीट नंबर 57, 59 व 60 वाराणसी से झांसी के लिए एडवोकेट वकील चंद्र दुबे (सीपरी बाजार की के.के. पुरी निवासी) अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे। वकील ने झांसी पहुंचकर जीआरपी को बताया कि उसके पास 50 हजार रुपये थे।
आयोध्या स्टेशन पर खाना खाने के बाद वकील ने कोट को बैग में रख लिया। कोट की जेब में 50 हजार रुपये थे। इसके बाद वकील बैग में ताला लगाकर सो गए। ट्रेन जब पारीछा और चिरगांव स्टेशन के बीच चल रही थी, तभी उनकी नींद खुली। संदेह होने पर उन्होंने बैग का जायजा लिया। बैग से कोट गायब था।
घबराए हुए वकील ने आनन-फानन में इसकी जानकारी साथ में चल रहे बेटे मनीष दुबे को दी। दुबे का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली कि उनका कोट कालपी में चढ़ा दातून बेचने वाला युवक पहने हुआ था।
संदिग्ध युवक को खोजा जा रहा था, तभी किसी ने बताया कि वह कोट शौचालय में टंगा हुआ नजर आया है। कोट मिल गया, लेकिन उसमें रखे 50 हजार रुपये गायब थे।
संदिग्ध युवक को तलाशते हुए पीड़ित वकील जब कोच एस-13 में पहुंचे तो वहां वह युवक नजर आ गया। सहयात्रियों की मदद से पकड़ लिया और उसकी तलाशी ली गई। तलाशी में जब रुपये नहीं मिले तो वकील ने उसकी जमकर पिटाई की और झांसी पहुंचने के बाद उसे जीआरपी के हवाले कर दिया।
पकड़े गए युवक से इसकी जानकारी ली गई तो उसने अपना परिचय कालपी निवासी देवीदास के बेटे राजा बताया और कहा कि उसने कोई चोरी नहीं की है। तभी वह कोट बर्थ के नीचे पड़ा हुआ था।
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