चौथी औद्योगिक क्रांति से हो सकता है देश को लाभ

दावोस में गत महीने विश्व आर्थिक मंच में चर्चा किया गया एक प्रमुख विषय था चौथी औद्योगिक क्रांति (एफआईआर)। कुछ विकसित देशों में चौथी औद्योगिक क्रांति जारी भी है और इसे लेकर यह डर दिखाया जा रहा है कि यह पुरानी प्रौद्योगिकी को उलट-पुलट कर रख देगी और इससे बेरोजगारी पैदा होगी।

दावोस में गत महीने विश्व आर्थिक मंच में चर्चा किया गया एक प्रमुख विषय था चौथी औद्योगिक क्रांति (एफआईआर)। कुछ विकसित देशों में चौथी औद्योगिक क्रांति जारी भी है और इसे लेकर यह डर दिखाया जा रहा है कि यह पुरानी प्रौद्योगिकी को उलट-पुलट कर रख देगी और इससे बेरोजगारी पैदा होगी।

इस डर के उलट चौथी औद्योगिक क्रांति में व्यापक स्तर पर रोजगार पैदा करने की क्षमता है।

चौथी औद्योगिक क्रांति आखिर है क्या?

पहली औद्योगिक क्रांति 1700 ईस्वी के आसपास शुरू हुई, जिसमें मानवीय शक्ति के स्थान पर भाप इंजन की शक्ति का उपयोग शुरू हुआ।

दूसरी क्रांति 1900 इस्वी के आसपास शुरू हुई। इसमें बिजली से चलने वाली मशीनों का उपयोग शुरू हुआ। तीसरी क्रांति 1960 के दशक में शुरू हुई, जो कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वचालित मशीनों पर आधारित थी।

चौथी औद्योगिक क्रांति आज की क्रांति है, जो प्रमुखत: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), अनवरत इंटरनेट कनेक्टिविटी, तेज रफ्तार संचार, डिजाइन का लघु रूपांतरण और 3डी प्रिंटिंग पर आधारित है। 3डी प्रिंटिंग के तहत वस्तुओं का विनिर्माण और उत्पादन उसी जगह पर हो सकता है, जहां उसकी जरूरत है। भारत जैसे देश खासतौर से आईओटी और 3डी प्रिंटिंग के जरिए चौथी औद्योगिक क्रांति का हिस्सा बन सकते हैं।

देश की 60 फीसदी ग्रामीण आबादी का जीवनस्तर चौथी औद्योगिक क्रांति से काफी सुधर सकता है।

ग्रामीण आबादी की आय बढ़ाने के लिए उच्च प्रौद्योगिकी युक्त सटीक खेती का उपयोग किया जा सकता है, यह खेती या तो जमीन पर हो सकती है या किसी कंटेनर में हो सकती है।

कंटेनर खेती करने वालों का दावा है कि इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में सिर्फ 10 फीसदी पानी की जरूरत पड़ती है और कई बार उपज हासिल की जा सकती है। इसे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हो सकता है।

3डी प्रिंटिंग के तहत दुनिया में कहीं भी डिजाइन तैयार की जा सकती है और इसे इंटरनेट के सहारे कहीं भी भेजा जा सकता है, जहां 3डी पिंट्रिंग तकनीक के सहारे वस्तु का विनिर्माण किया जा सकता है। इस प्रौद्योगिकी का तेजी से प्रसार हो रहा है। इससे वस्तुओं के परिवहन में लगने वाली ऊर्जा की बचत हो जाएगी।

चौथी औद्योगिक क्रांति से एक विकेंद्रिकृत तथा लोकतांत्रिक समाज का निर्माण होगा, क्योंकि इसके तहत उत्पादन के साधनों पर स्थानीय लोगों का नियंत्रण होगा।

(अनिल के. राजवंशी महाराष्ट्र के फलटन में स्थित निंबकर कृषि शोध संस्थान के निदेशक हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

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