नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। भारत में कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि योग्य जमीन पर सिंचाई की व्यवस्था बढ़ाने और पानी के दक्ष उपयोग और युक्तिसंगत कीमत निर्धारण के उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को अपनाने की जरूरत है। समीक्षा में यह भी कहा गया है कि किसानों के लिए स्थायी आजीविका और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत है।
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा शुक्रवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16 में कहा गया है कि निरंतर दो वर्षो तक सूखे के कारण कृषि उत्पादन में गिरावट और प्रमुख फसलों के बुवाई क्षेत्र में कमी आई है।
जेटली ने कहा कि किसानों के लिए स्थायी आजीविका और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत है। कृषि में कायाकल्प के लिए कृषि में उत्पादकता बढ़ाकर, सक्षम सिंचाई प्रौद्योगिकियों में निवेश और सभी इनपुटों के कुशल प्रयोग की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “कृषि प्रणालियों की दक्षता कृषि उत्पादकता बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। कृषि संबंधी कार्यबल, नीति आयोग 2015 के अनुसार पानी की लगातार बढ़ती कमी, अति सिंचाई के कारण पानी की बबार्दी और मिट्टी की लवणता की समस्या के चलते भारत के कई भागों में सिंचाई की पुरानी प्रणालियां अव्यवहार्य हो गई हैं।”
समीक्षा में कहा गया है कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक के प्रयोग से पानी के कुशल उपयोग में सुधार किया जा सकता है। इसके साथ ही श्रम लागतों और बिजली की खपत घटाकर उत्पादन लागत घटाई जा सकती है।
समीक्षा में कहा गया है कि प्रत्येक कृषि कार्य के लिए बेहतर उपकरणों की उपलब्धता की दृष्टि से भारत में कृषि मशीनीकरण के स्तर पर अधिक कार्य किए जाने की जरूरत है। भारत में अधिकांश कृषि कार्यो के लिए मशीनीकरण का स्तर 50 फीसदी से कम है।
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