नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। भारत को इस्लाम के ‘संयत वैश्विक केंद्र’ के रूप में पेश करने के लिए यहां इस महीने पहले विश्व सूफी मंच (डब्ल्यूएसएफ)का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शरीक हो सकते हैं।
मंच के आयोजकों ने बताया कि पाकिस्तान समेत 20 देशों के 200 से भी अधिक मशहूर सूफी विद्वान समारोह में भाग लेंगे। भारत में मुसलमान सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं।
अखिल भारतीय उलेमा और मशाएख बोर्ड (एआईयूएमबी) के संस्थापक अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया कि एआईयूएमबी द्वारा 17-20 मार्च को आयोजित बैठक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है।
अशरफ ने कहा कि एआईयूएमबी भारत में सूफी धर्मस्थलों की शीर्ष संस्था है। समारोह का उद्देश्य दुनियाभर में हिंसक उग्रवाद से लड़ने के लिए इस्लाम के शांति और सहिष्णुता के संदेश को फैलाना है।
उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि आतंकी संगठनों द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए की गई इस्लाम की कट्टरपंथी व्याख्याओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए एक मंच की स्थापना का समय आ गया है। सीरिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में जेहादी ताकतों द्वारा फैलाए गए आतंक और जुल्म ने इस्लाम की छवि खराब की है।”
उन्होंने कहा, “भारतीय मुसलमान सूफीवाद के अपने सम्पन्न इतिहास का प्रसार करके इस्लाम के नाम पर दुनियाभर में हो रहे खूनखराबे का एक विकल्प दे सकते हैं।”
समारोह का उद्घाटन 17 मार्च को यहां विज्ञान भवन में होगा, जिसके बाद भारतीय इस्लामी संस्कृति केंद्र में दो दिवसीय सत्र का आयोजन होगा।
अंतिम सत्र 20 मार्च को रामलीला मैदान में आयोजित होगा।
dharmpath.com dharmpath