बीसीसीआई को कुछ मुद्दे उठाने की अनुमति दे सकती है शीर्ष अदालत

नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को संकेत दिया कि वह लोढ़ा समिति से एक-दो सिफारिशों पर पुनर्विचार के लिए कह सकता है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने को लेकर आ रही दिक्कतों के बारे में अदालत को बताया था। इसमें एक राज्य एक वोट की सिफारिश भी शामिल है।

प्रधान न्यायाधीश टी.एस ठाकुर और फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की खंडपीठ ने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात, दोनों के मिलकर सात वोट हैं। चार महाराष्ट्र और तीन गुजरात के। बीसीसीआई में इन क्रिकेट संघों के प्रतिनिधित्व का आधार ऐतिहासिक है ना कि भौगोलिक।

गुजरात क्रिकेट संघ के अलावा गुजरात से बड़ौदा क्रिकेट संघ और सौराष्ट्र क्रिकेट संघ आते हैं और तीनों ही बीसीसीआई के स्थायी सदस्य हैं। बीसीसीआई में इन सभी के वोट हैं।

महाराष्ट्र से महाराष्ट्र क्रिकेट संघ, विदर्भ क्रिकेट संघ, मुंबई क्रिकेट संघ और क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया हैं।

बीसीसीआई का प्रतिनिधित्वि कर रहे वकील के.के. वेणुगोपाल ने अदालत से अनुरोध किया कि बीसीसीआई को लोढ़ा समिति की कुछ सिफारिशों को लागू करने में समस्या आ रही है। इस पर न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा, ” सिफारिशों को वापस लोढ़ा समिति के पास भेजने की इच्छा जताना, सवाल उठाना नहीं है। हम इस बारे में सोचेंगे।”

इन संघों के बीसीसीआई के साथ संबंध को जायज बताने के लिए वेणुगोपाल ने इनकी बीसीसीआई के साथ ऐतिहासिक जुड़ाव की दलील दी। उन्होंने बताया कि यह संघ आजादी से पहले से ही बीसीसीआई के साथ जुड़े हैं।

बीसीसीआई की दलील से अदालत पर कोई असर ना पड़ता देखकर वेणुगोपाल ने कहा, “हम समिति की सिफारिशों के खिलाफ नहीं हैं, हम चाहते हैं कि सहमति से एक फैसला लिया जाए।”

अदालत ने बीसीसीआई से उसके द्वारा राज्य क्रिकेट संघों को आवंटित की गई राशि की जानकारी भी मांगी।

अदालत ने कहा, “हम चाहते हैं कि आप हमें इस बात की जानकारी दें कि आपने राज्यों को कितनी राशि आवंटित की है? यह भी बताएं कि आपने राज्यों को जो राशि दी है, उसको कहां खर्च किया जाएगा? और, बताएं कि क्या इस मामले की निगरानी की गई है?”

अदालत ने वेणुगोपाल से पूछा, “आपने कितनी राशि दी और क्या इस पर नजर रखी गई ?”

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