पहले ओलावृष्टि और फिर सूखे की मार से जूझता किसान इन संकटों से उबरने का अभी रास्ता ही खोज रहा है कि कुदरत की बेरुखी ने एक बार फिर किसानों को चिंता बढ़ा दी है। शनिवार की देर शाम कई इलाकों में बिन मौसम के ओलों के साथ बारिश हो गई।
रविवार को जब किसान खेतों में पहुंचे तो नजारा देखकर उनके चेहरे पूरी तरह से मुरझाए नजर आए। इस बारिश से भले गेहूं की फसल को लाभ मिल रहा है, लेकिन खेतों में खड़े मटर, चना और मसूर के लिए ये काफी हानिकारक है। ओलों के साथ हुई बारिश को देख किसान कभी अपनी फसल को याद कर रहा है तो कभी भगवान को।
हर बार अपनी बदकिस्मती को भूलकर अन्नदाता एक बार फिर खेतों में उतरता है तो उसे लगता है कि शायद इस बार किस्मत उसके साथ दगा नहीं करेगी, लेकिन प्रकृति भी लगातार बुंदेलखंड के किसानों के सब्र की परीक्षा ले रही है और उसे कुछ रास्ता नहीं सूझ रहा है।
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