मंडी, 7 मार्च (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के इस ऐतिहासिक नगर में सैकड़ों गांवों के मंदिरों से देवताओं को सप्ताह भर चलने वाले महाशिवरात्रि उत्सव के लिए एकत्रित किया जा रहा है।
उत्सव के आयोजक अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी विवेक चंदेल ने आईएएनएस को बताया, “इस साल महाशिवरात्रि के लिए कुल 216 देवताओं को आमंत्रित किया गया है। प्रमुख देवता देव कमरूनाग रविवार को यहां पहुंचे।”
चंदेल ने बताया कि पिछली बार 185 देवता उत्सव में सम्मिलित हुए थे।
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि इस बार भी 180 से ज्यादा देवताओं का जमावड़ा होगा।”
ढोल-नगाड़ों की धुन के साथ खूबसूरती से सजी पालकियों में देवताओं का आगमन शुरू हो गया है। ज्यादातर देवताओं के मंगलवार तक पहुंचने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इसी दिन उत्सव का शुभारंभ करेंगे।
उत्सव का समापन 14 मार्च को होगा और राज्यपाल आचार्य देवव्रत समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
विष्णु के अवतार माने जाने वाले प्रमुख देवता देव माधो राय उत्सव के पहले दिन मंगलवार को शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे।
एकत्रित हुए अन्य सभी देवी, देवता सुंदर पालकियों में उनके पीछे चलेंगे और यहां भूतनाथ मंदिर में एकत्रित होंगे।
उत्सव के आरंभ, मध्य (11 मार्च)और समापन के दिनों में ‘जलेब’ नामक ऐसी तीन शोभायात्राएं निकाली जाएंगी।
किंवदंती के मुताबिक, राजा सेन (1499-1534) को सपने में एक गाय भगवान शिव को दूध अर्पित करते दिखाई दी थी। उनका यह सपना हकीकत बन गया, जब उन्होंने सचमुच एक गाय को प्रतिमा को दूध चढ़ाते देखा।
इसके बाद सेन ने 1526 में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर का निर्माण कराया। उसी समय मंडी शहर की नींव रखी गई और बाद में सेन ने यहां अपनी राजधानी स्थानांतरित कर ली।
रियासतों के समाप्त होने के बाद से प्रशासन शिवरात्रि उत्सव के लिए देवताओं को आमंत्रित कर रहा है। प्रशासन उत्सव में शामिल होने के लिए देवताओं के ‘करदारों’ (देवताओं के अनुचरों) को मानदेय भी देता है।
उत्सव के दौरान ‘बजंतरी’ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें 3,000 से भी ज्यादा कलाकारों के सम्मिलित होने का अनुमान है।
हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक उत्सव में शामिल होते हैं। इसके अलावा स्थानीय देवी, देवताओं का अध्ययन कर रहे शोधकर्ता भी इस समय यहां आते हैं।
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