लखनऊ, 8 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में महापौर के अधिकारों में कटौती संबंधी विधेयक को मंजूरी नहीं दिए जाने से नाराज संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने मंगलवार को राजभवन पर काफी गंभीर आरोप लगाए।
आजम का कहना है कि महापौरों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने विधेयक राजभवन भेजा था, जिसे मंजूर नहीं किया जा रहा है।
इस पर अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि वह राज्यपाल को व्यक्तिगत रूप से उनकी भावना से अवगत करवा देंगे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में नगर विकास मंत्री आजम खां ने कहा कि ऐसे महापौर जो कर्मचारियों अधिकारियों से गाली-गलौज करते हैं, जो बेईमानी पसंद हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करने को सरकार ने एक विधेयक पास किया था। इसमें ऐसे महापौरों को सजा दिलाने का प्रावधान है, लेकिन राजभवन इसे मंजूरी नहीं दे रहा है।
आजम ने कहा, “देश में किसी भी नागरिक पर मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन महापौर कुछ करें तो उन्हें सजा नहीं दी जा सकती। यह हैरत की बात है कि भाजपा को न जाने क्यों ऐतराज है। लगता है कि भाजपा के महापौरों को सजा न मिल सके, इसलिए विधेयक को मंजूरी नहीं दी जा रही। ऐसा होना बहुत ही अफसोसनाक है। आखिर मैं कैसे महकमा चलाऊं।”
विधानसभा में भाजपा के नेता सुरेश खन्ना ने इस पर ऐतराज जताते हुए कहा कि ऐसा करना सदन की परंपरा का उल्लंघन है। सदन में राजभवन पर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। यह आपत्तिजनक है, इसे सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाना चाहिए।
इस पर अध्यक्ष ने आजम खां से कहा, “यह संवैधानिक व्यवस्था है कि राज्यपाल किसी विधेयक को रोक सकते हैं। आपकी भावना से मैं उनको व्यक्तिगत रूप से अवगत करवा दूंगा।”
पांडेय ने भाजपा के सुरेश खन्ना को भी भरोसा दिलाया कि वह जो भी आपत्तिजनक होगा, उसे कार्यवाही से हटा देंगे।
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