नई दिल्ली, 8 मार्च (आईएएनएस)। विश्व टीबी दिवस के करीब होने पर मंगलवार को सभी दलों के पूर्व एवं वर्तमान सांसदों ने देश में यक्ष्मा (टीबी) से लड़ने के संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर किए।
ग्लोबल कोएलिशन अगेंस्ट टीबी (जीसीएटी) द्वारा आयोजित सांसदों की गोलमेज सभा में मौजूद राजनीतिक नेताओं ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर एवं रणनीतिक स्तर पर काम करने का संकल्प लिया, ताकि हमारा देश टीबी को खत्म करने की दिशा में संवहनीय विकास लक्ष्यों को हासिल कर सके।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, जीसीएटी के प्रेसीडेंट दलबीर सिंह एवं कालिकेश सिंह देव एवं जितिन प्रसाद सहित कई सांसदों ने गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
इस अवसर पर नड्डा ने कहा कि विगत दो दशकों में भारत ने टीबी नियंत्रण के प्रयास तेज किए हैं। भारत ने एचआइवी/एड्स, मलेरिया और टीबी जैसे गंभीर संचारणीय रोगों का प्रसार रोकते हुए मिलेनियम डेवलपमेंट गोल 6 को सफलतापूर्वक हासिल किया है।
उन्होंने कहा, “लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और हम यथासंभव कम-से-कम अवधि में टीबी से होने वाली मृत्यु की संख्या शून्य पर लाने के लिए संकल्पित हैं। टीबी हारेगा, देश जीतेगा।”
भारत की प्रगति और विकास में टीबी एक बड़ी समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2015 के अनुसार, दुनिया भर में हर साल टीबी के 96 लाख मामलों में करीब एक-चौथाई भारत में पाया जाता है। 2014 में देश में 22 लाख मामले सामने आए और इस रोग से 2,20,000 भारतीय लोगों की मृत्यु हो गई। वहीं, 2006 से 2014 के बीच टीबी के कारण भारतीय अर्थतंत्र पर 340 अरब डॉलर का बोझ पड़ा।
दलबीर सिंह ने कहा, “2014 में टीबी के कारण अनुमानत: 2 लाख भारतीय की मौत हो गई। हमने 2030 के आते-आते इस महामारी को समाप्त करने का संकल्प लिया है। यह देखकर खुशी होती है कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने चिंता व्यक्त की है और लाखों लोगों की जिंदगी से जुड़े उद्देश्यों के प्रति अपना संकल्प व्यक्ति किया है। हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में सकारात्मक नीतिगत परिवर्तन होंगे।”
उन्होंने कहा कि देश में टीबी के बढ़ते संकट का हाल निकालने के लिए 2012 में जीसीएटी का गठन किया गया और नीति निर्धारकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिम समाज के प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों को एक मंच पर एकत्र किया, ताकि भारत में टीबी निवारण और चिकित्सा की चुनौतियों पर चर्चा हो सके।
जीसीएटी की परामर्शी परिषद में अलग-अलग राजनीतिक दलों के विशिष्ट सांसद हैं। बीजू जनता दल के सांसद एवं जीसीएटी की परामर्शी परिषद के सदस्य कलिकेश सिंह देव ने कहा, “मेरे सांसद मित्रगण और मैं पूरी तरह इस उद्देश्य के साथ हूं। हम सभी निकट भविष्य भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
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