इंदौर ने पेश की सहिष्णुता की मिसाल

इंदौर, 13 मार्च (आईएएनएस)। देश में भले ही इन दिनों सहिष्णुता और असहिष्णुता को लेकर बहस छिड़ी हो, मगर इंदौर में हिंदू-मुस्लिम समाज के लोगों ने सहिष्णुता की मिसाल पेश की है। ऐसा मामला जो बीते 25 वर्षो से न्यायालय में नहीं निपट पाया, उसे दोनों समाज के लोगों ने महज कुछ घंटों की बैठक में निपटा दिया।

इंदौर, 13 मार्च (आईएएनएस)। देश में भले ही इन दिनों सहिष्णुता और असहिष्णुता को लेकर बहस छिड़ी हो, मगर इंदौर में हिंदू-मुस्लिम समाज के लोगों ने सहिष्णुता की मिसाल पेश की है। ऐसा मामला जो बीते 25 वर्षो से न्यायालय में नहीं निपट पाया, उसे दोनों समाज के लोगों ने महज कुछ घंटों की बैठक में निपटा दिया।

मामला मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के बेटमा थाना क्षेत्र का है। यहां के वार्ड क्रमांक सात में शीतला माता मंदिर और दरगाह इमामबाड़ा है। इन दोनों धार्मिक स्थलों के बीच जमीन का एक टुकड़ा खाली पड़ा है। खाली पड़ी जमीन पर दोनों समाज के लोग अपना-अपना दावा ठोंक रहे थे। मालिकाना हक के लिए मामला उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ में चल रहा है।

हिंदू समाज और लखेरा समाज के प्रतिनिधियों ने जमीन संबंधी मामले को निपटाने के लिए शनिवार को बैठक बुलाई। इस बैठक में तय हुआ कि लगभग 31 फुट जगह मंदिर को दी जाएगी और शेष जमीन दरगाह के नाम कर दी जाएगी। साथ ही इससे संबंधित मुकदमा वापस लेने और नगर परिषद में जमीन का नामांतरण कराने पर भी सहमति बन गई।

बेटमा थाने के प्रभारी राजकुमार यादव ने रविवार को आईएएनएस को बताया कि दोनों समाज के प्रतिनिधियों में खाली पड़ी जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। यह मामला बीते 25 वर्षो से न्यायालय में लंबित है, पर शनिवार को हिंदू व लखेरा समाज के प्रतिनिधियों ने बैठक कर इसे आपसी सहमति से निपटा लिया। यादव ने बताया कि दोनों समाज के प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति का एक आवेदन उन्हें भी सौंपा गया है। यह एक ऐतिहासिक कदम है।

बताया गया है कि प्राचीन शीतला माता मंदिर से दरगाह तक कुल 72 फुट जमीन है, जिसमें से साढ़े 14 फुट में दरगाह और 10 फुट में मंदिर बने हुए हैं। शेष भूखंड खाली पड़ा है। इस पर दोनों समाज के प्रतिनिधि अपना-अपना दावा करते आ रहे थे। इस विवाद को निपटाने के लिए नगर परिषद के अध्यक्ष धर्मवीर िंसंह चौहान और लखेरा समाज के अध्यक्ष हाजी फकीर मोहम्मद शेख के बीच पहले दो बार बैठक हुई। इसके बाद शनिवार को समाज के प्रतिनिधियों की बैठक हुई, जिसमें उपरोक्त बिन्दुओं पर आपसी सहमति बनी।

सहिष्णुता और असहिष्णुता के बीच छिड़ी बहस के बीच बेटमा के हिंदू और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने अन्य लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि आपस में मिलजुल कर रहना ही समाज के हित में है।

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