नगौर(राजस्थान), 13 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी पोशाक में बदलाव करने का फैसला किया है। संघ ने रविवार को यह निर्देश जारी करते हुए कहा कि संघ के सदस्य अब पारंपरिक खाकी निकर की जगह भूरे रंग की पैंट पहनेंगे।
आरएसएस महासचिव भैयाजी जोशी ने यहां मीडिया को बताया, “हमने स्वयंसेवकों की पोशाक बदलने का फैसला किया है। हमने खाकी निकर की जगह भूरे रंग की पैंट को आरएसएस की पोशाक में शामिल करने का फैसला किया है।”
आरएसएस ने देश के कुछ मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की परंपरा का भी विरोध किया है।
जोशी ने कहा, “अगर कोई अनुचित परंपरा है, तो उसे बातचीत और चर्चा द्वारा बदला जाना चाहिए।”
पोशाक बदलने का निर्णय राजस्थान के नगौर में आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक में लिया गया।
जोशी ने कहा, “सामान्य जीवन में पैंट ज्यादा प्रचलित हैं। हम समय के साथ चलते हैं और इसलिए हमें ड्रेस कोड बदलने को लेकर कोई हिचकिचाहट नहीं है।”
कई लोगों ने इसे युवाओं को आरएसएस की ओर आकर्षित करने का प्रयास बताया है।
जोशी ने कहा, “इसमें चार-छह महीने का समय लग सकता है क्योंकि पोशाक बदलने का संदेश देश के कम से कम 50,000 गांवों, कस्बों और शहरों तक पहुंचाना है।”
जोशी ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पैंट के कारण स्वयंसेवकों को व्यायाम या अभ्यास में कोई परेशानी होगी।
आरएसएस नेता ने कहा, “क्रिकेट और जूडो कराटे खिलाड़ी और योग करने वाले भी ट्रैक सूट और पैंट पहनते हैं। इसलिए यह कहना गलत है कि पैंट पहनने से स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण या व्यायाम प्रभावित होगा।”
जोशी ने कहा कि भूरे रंग के चुनाव का कोई खास कारण नहीं है। इस रंग का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि यह आसानी से मिल जाता है और आकर्षक लगता है।
आरएसएस नेता ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर की हालिया घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की।
जोशी ने कहा, “देश के विरोध में नारे लगाए गए। यह कैसी मानसिकता है? यह चिंता का विषय है। हमें विचार करना चाहिए कि किसने ऐसी मानसिकता को पनपने दिया है। इस मामले में समाज ने जिस तरह प्रतिक्रिया दी, वह स्वागतयोग्य है।”
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