धर्मशाला, 20 मार्च (आईएएनएस)। दुनिया भर के निर्वासित तिब्बतियों ने ‘सिकयोंग’ (प्रधानमंत्री) और यहां स्थित निर्वासित संसद के प्रत्याशियों के चुनाव के लिए रविवार को अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
धर्मशाला, 20 मार्च (आईएएनएस)। दुनिया भर के निर्वासित तिब्बतियों ने ‘सिकयोंग’ (प्रधानमंत्री) और यहां स्थित निर्वासित संसद के प्रत्याशियों के चुनाव के लिए रविवार को अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
प्रधानमंत्री पद के दो दावेदारों लोबसांग सांगे (वर्तमान प्रधानमंत्री) और तिब्बती संसद के अध्यक्ष पेनपा सेरिंग में से किसी एक का चुनाव करने के लिए शहर के नौ मतदान केंद्रों पर सुबह से ही महिलाओं और पुरुषों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के प्रेस अधिकारी जैम्फेल शोनू ने आईएएनएस को बताया कि यूरोपीय संसद के सदस्यों का एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल तिब्बती चुनाव के पर्यवेक्षण के लिए यहां मौजूद है।
मतदाता, संसद के 45 सदस्यों का भी चुनाव करेंगे। कुल 94 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। परिणाम 27 अप्रैल को घोषित किए जाएंगे।
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा मतदाता नहीं हैं।
पूरे विश्व के 90 हजार से अधिक तिब्बतियों ने इस मतदान में हिस्सा लिया। अमेरिका और यूरोप में चुनावी प्रक्रिया चल रही है।
भारत के दार्जीलिंग, देहरादून, बाइलाकुप्पे और दिल्ली में भी मत डाले जा रहे हैं। भारत में मतदान शाम पांच बजे खत्म हो जाएगा।
इसके अलावा जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य देशों में भी चुनाव प्रक्रिया चल रही है। 47105 तिब्बती पिछले साल अक्टूबर में प्रांरभिक दौर के मतदान कर चुके हैं।
वर्ष 2011 में दलाई लामा ने अपने सभी राजनैतिक अधिकारों का हस्तांतरण कर दिया था। इसके बाद तिब्बत की सरकार को चुनने वाला 2016 का यह आम चुनाव दूसरा प्रत्यक्ष चुनाव है।
प्रधानमंत्री सांगे का पांच साल का कार्यकाल अगस्त में समाप्त हो जाएगा। सांगे के दोबारा इस पद के लिए चुने जाने की संभावना काफी ज्यादा है, क्योंकि इनके पास 19 हजार 776 वोट सुरक्षित हैं, वहीं इनके करीबी प्रतिद्वंद्वी के पास 10 हजार 732 वोट ही हैं।
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