हैदराबाद, 21 मार्च (आईएएनएस)। आंध्र विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने वाईएसआर कांग्रेस की विधायक आर.के. रोजा को एक साल के लिए सदन से निलंबित करने की अनुशंसा की है।
विधानसभा अध्यक्ष के.शिवप्रसाद राव ने सोमवार को समिति की रिपोर्ट को सदन पटल पर रखा।
रिपोर्ट को सदन में पेश कर हैदराबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें रोजा के निलंबन पर रोक लगाई गई थी।
पिछल हफ्ते रोजा के निलंबन पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष विशेषाधिकार समिति की अनुशंसा के आधार पर फैसला लेने से प्रतिबंधित नहीं हैं।
उच्च न्यायालय ने 17 मार्च को अपने अंतरिम आदेश में रोजा के निलंबन पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद रोजा को बजट सत्र के दौरान सदन में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए विधानसभा के सचिव ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की।
उधर, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी उच्च न्यायालय में सरकार के खिलाफ अवमानना का मुकदमा दायर करने पर विचार कर रही है। राज्य में इस इकलौती विपक्षी पार्टी ने तेलुगू देशम पार्टी पर आरोप लगाया है कि वह न्यायालय के आदेश का सम्मान नहीं कर रही है।
उल्लेखनीय है कि रोजा चित्तूर जिले के नागरी विधानसभा क्षेत्र से वाईएसआर कांग्रेस की विधायक हैं। सदन की शीतकालीन सत्र के दौरान कथित रूप से मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू समेत तेलुगू देशम पार्टी के सदस्यों के खिलाफ ‘अशिष्ट भाषा’ का प्रयोग करने पर उन्हें एक साल के लिए निलंबित किया गया था।
रोजा के निलंबन के लिए सदन में ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसे अध्यक्ष ने बाद में विशेषाधिकार समिति को प्रेषित कर दिया था।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रोजा को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं।
विधानसभा की समिति ने वाईएसआर कांग्रेस की एक और विधायक कोदाली नानी के खिलाफ कार्रवाई का मसला सदन पर ही विचार के लिए छोड़ दिया है।
इनके अलावा चार अन्य वाईएसआर विधायकों को समिति ने सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया है।
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