पीडीपी-भाजपा गठबंधन बनाए रखने का श्रेय मोदी को

जम्मू, 25 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में सरकार गठन पर दो महीने से अधिक समय तक संशय बरकरार रहने के बाद आखिरकार पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं।

जम्मू, 25 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में सरकार गठन पर दो महीने से अधिक समय तक संशय बरकरार रहने के बाद आखिरकार पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं।

राज्य में सरकार गठन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जा रहा है, क्योंकि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ही दोनों पार्टियों के बीच बात बन पाई।

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद पीडीपी ने सरकार गठन को लेकर विलंब करने की रणनीति अपनाई, ताकि भाजपा उनकी शर्तो पर सरकार बनाने को तैयार हो सके। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ तय गठबंधन के एजेंडे पर कायम रहे।

जानकार सूत्रों ने नई दिल्ली में आईएएनएस से कहा कि मोदी गठबंधन पर किसी प्रकार की ड्रामेबाजी के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि वह जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के हितों को लेकर दृढ़प्रतिज्ञ थे।

सूत्र ने कहा, “यह प्रधानमंत्री की ही सोच थी कि पीडीपी के साथ गठबंधन जारी रखना राज्य में शांति के हित में और पड़ोसी देश के साथ संबंधों में सुधार के एजेंडे के हक में है।”

मोदी का संदेश दोहराते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में कहा कि भाजपा-पीडीपी गठबंधन के एजेंडे का कार्यान्वयन होगा और इस प्रतिबद्धता से पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

जेटली ने बाद में एक टॉक शो में कहा, “हमने मुफ्ती साहब को तब खो दिया, जब हमें उनकी सर्वाधिक जरूरत थी। महबूबा को कुर्सी संभालनी चाहिए और अपने पिता के सपने साकार करने चाहिए।”

बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूतों के माध्यम से महबूबा को इस बात से अवगत कराया कि सरकार गठन को लेकर वह उनसे बातचीत के लिए तैयार हैं और इसे लेकर उनके मन में जो भी शंका है, उसका समाधान किया जा सकता है।

भाजपा के एक उच्चस्तरीय सूत्र ने कहा, “उन्होंने प्रधानमंत्री से करीब आधा घंटा तक बातचीत की, जिस दौरान उन्हें हर संभव समर्थन का आश्वासन दिया गया और उनके पिता के सपनों के रूप में गठबंधन के एजेंडे को आगे बढ़ाने की सलाह दी गई।”

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में सात जनवरी को निधन होने तक जम्मू एवं कश्मीर में लगभग 10 महीने तक पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार रही थी।

अगले ही दिन राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया।

लेकिन इसके बाद गठबंधन की बागडोर संभालने के बदले महबूबा ने सरकार गठन को लेकर चुप्पी साध ली। एक समय तो यह कहा जाने लगा कि महबूबा गठबंधन से अलग होने पर विचार कर रही हैं।

भाजपा ने हालांकि स्पष्ट कर दिया कि वह पीडीपी की कोई नई मांग नहीं मानेगी और गठबंधन पहले के एजेंडे के अनुसार ही चलेगा।

इसी वक्त, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और महासचिव व जम्मू एवं कश्मीर मामलों के पार्टी प्रभारी राम माधव ने कहा कि पीडीपी और भाजपा के बीच का गठबंधन अक्षुण्ण है।

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा ने गठबंधन के एजेंडे पर ताजा आश्वासन मांगा। एक तरफ पीडीपी हीलाहवाली कर रही थी, जबकि दूसरी तरफ भाजपा ने कड़ा रुख अख्तियार कर रखा था।

भाजपा ने कहा, “मुफ्ती साहब के साथ तय एजेंडे को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए। यह अंतिम है और इसका कार्यान्वयन होगा।”

भाजपा सूत्र ने कहा कि नई दिल्ली में इस महीने अंतर्राष्ट्रीय सूफी सम्मेलन में मोदी का संबोधन हर व्यक्ति के दिल तक पहुंचने का एक प्रयास और बहुलवाद में भारत के विश्वास को दृढ़ करना था।

महबूबा बार-बार दोहराती रहीं कि उन्हें सत्ता की भूख नहीं है, जबकि भाजपा के कहने पर राम माधव ने उनसे दो बार बात की। दोनों में से एक मुलाकात को गुप्त रखा गया।

पीडीपी अध्यक्ष ने विधायकों व वरिष्ठ नेताओं को गुरुवार को अपने संबोधन में गठबंधन के एजेंडे पर प्रतिबद्धता के लिए भाजपा का शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने विधायकों की खरीद-फरोख्त से दूर रहने के लिए भी भाजपा और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा, “भाजपा ने बिल्कुल दूसरी तरह से व्यवहार किया।” वह अतीत में राज्य में कांग्रेस द्वारा की गई कथित खरीद-फरोख्त की ओर इशारा कर रही थीं।

अंतत: महबूबा ने जम्मू एवं कश्मीर की प्रथम महिला मुख्यमंत्री के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने को लेकर अपनी रजामंदी दे दी।

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