भुवनेश्वर, 26 मार्च (आईएएनएस)। बच्चों में दस्त यानी डायरिया की बीमारी कम हो इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को यहां रोटा वायरस का टीका लांच किया। यह पूरे देश में जनता को सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में मुफ्त में मिलेगा। शुरुआत में यह सुविधा चार राज्यों में रहेगी।
स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने इस टीके की लांचिंग को भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के इतिहास में इसे ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा, “यह एक सामान्य कार्यक्रम नहीं है। रोटा वायरस की लांचिंग ने भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के क्षेत्र में एक लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। इस टीके के जरिये हमारा उद्देश्य देशभर के 2.7 करोड़ बच्चों में रोटा वायरस से होने वाली बीमारियों से प्रतिरक्षण की क्षमता विकसित कराना है।”
रोटा अत्यंत संक्रामक वायरस है। एक साल से कम उम्र के बच्चे इससे ज्यादा संक्रमण के शिकार होते हैं। बच्चों में दस्त की बीमारी का यह सबसे सामान्य कारण होता है। इसी वजह से बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है और अक्सर बच्चे मौत के शिकार हो जाते हैं।
नड्डा ने कहा, “सरकार आक्रामक ढंग से यक्ष्मा (टीबी) और कुष्ट समेत बहुत सारी बीमारियों को भी समाप्त करने के लिए काम कर रही है।”
उन्होंने कहा, “हमारा कर्तव्य है कि देश में जो भी बच्चा पैदा हो, वह खतरनाक बीमरियों से संरक्षित हो।”
इस टीके को चरणबद्ध ढंग से उपलब्ध कराया जाएगा। पहले चरण में ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और आंध्र प्रदेश में इसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डेढ़ माह से अधिक उम्र के बच्चों को उपलब्ध कराया जाएगा।
ओडिशा में इस टीके को लांच इस वजह से किया गया कि इस राज्य में बच्चों में डायरिया के सर्वाधिक मामले आते हैं और सही देखभाल नहीं होने की वजह से बच्चों की मौत हो जाती है।
अभी ओडिशा में जितनी भी बीमारियां होती हैं, उनमें 9.2 फीसदी डायरिया के मरीज होते हैं।
पूरी दुनिया में रोटा वायरस की वजह से प्रति वर्ष 4 लाख 53 हजार बच्चे मरते हैं। भारत हर साल इस वायरस से संक्रमित 8.7 लाख बच्चे अस्पताल में भर्ती कराए जाते हैं, जिनमें 78 हजार बच्चों की मौत हो जाती है।
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