सच तो यह है कि किसानों के पास न तो सरकारी अधिकारी पहुंच रहे हैं और न ही उनके ही क्षेत्र से चुने हुए प्रतिनिधि। होली के हुड़दंग में जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा तो मुख्यालय पर लगा, लेकिन कहीं डीजे तो कहीं ढोल-नगाड़ों की धुनों पर थिरकते जनप्रतिनिधियों को किसानों के दुख का एहसास भी नहीं हुआ।
वहीं ताजा घटना में बर्बाद फसल के अलावा बैंक व साहूकार के कर्ज तले दबे किसान ने खेत पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
थाना बार क्षेत्र के ग्राम देवरान निवासी 55 वर्षीय गुबंदा सहरिया पुत्र दसईं के पास गांव में ही डेढ़ एकड़ जमीन थी। विगत दो वर्षों में ओलावृष्टि-अतिवृष्टि के साथ-साथ इस वर्ष भी सामान्य से कम बारिश होने से सूखा पड़ने के कारण इस वर्ष भी फसल नष्ट हो गई।
परिजनों व ग्रामीणों के अनुसार, डेढ़ एकड़ जमीन में फसल बोने के लिए गुबंदा ने सहकारी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड एवं साहूकारों से कर्ज लेकर बीज बोया था। फसल बोने के बाद पानी भी रुपयों में खरीदकर खेतों में सिंचाई की थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा के चलते इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने से फसल जहां एक ओर सूखी तो वहीं ओलावृष्टि होने से बची-रही कसर भी पूरी हो गई। खेत में बोई गई फसल पूरी तरह से चौपट हो गई।
परिजनों ने बताया कि गुबंदा ने खेतों में बीज बोने के लिए साहूकारों व बैंक से केसीसी पर रुपये लिए थे। फसल चौपट होने के बाद रुपये न लौटा पाने की चिंता में वह परेशान रहता था। इसी कारण गुबंदा ने खेत में जाकर फांसी लगा ली।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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