केरल में कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन में अड़चन

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 30 मार्च (आईएएनएस)। केरल में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन में बुधवार को अप्रत्याशित अड़चन आ गई। ऐसा इस वजह से हुआ क्योंकि मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने चुनावी दौड़ से हटने की इच्छा जता दी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वी. एम. सुधीरन द्वारा उम्मीदवारों के चयन के मानदंड का मुद्दा उठाए जाने के बाद चांडी ने अपनी यह इच्छा जताई।

चांडी के एक करीबी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अभी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है क्योंकि सुधीरन अड़े हुए हैं। वह पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को इस आधार पर बदलना चाहते हैं कि वे अभी विवादों में हैं जबकि कुछ अन्य लंबे समय से चुनाव लड़ रहे हैं।

चांडी के सहयोगी ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, “चांडी ने पार्टी के राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय नेताओं को यह स्पष्ट कर दिया है कि सुधीरन जिस पैमाने की बात कर रहे हैं, अगर वही तय हो गए तो फिर ये न केवल राज्य के नेताओं पर लागू होंगे बल्कि शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं पर भी लागू होंगे। उन्होंने कहा है कि वह इस चुनावी दौड़ से बाहर रहेंगे।”

केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोमवार रात से दिल्ली में हैं। प्रत्याशियों के चयन की समिति की दो बार बैठक हो चुकी है। संकट तब शुरू हुआ जब सुधीरन ने कहा कि आरोपों का सामना कर रहे मंत्रियों और बुजुर्गो को किनारे रखा जाए।

सुधीरन जिन्हें टिकट देने का विरोध कर रहे हैं उनमें उत्पाद राज्य मंत्री के. बाबू (बार घोटाले में आरोपों का सामना कर रहे ), राजस्व मंत्री अदूर प्रकाश (भूमि हस्तांतरण को लेकर विवादों में हैं, पिछल माह यह हस्तांतरण हुआ था और बाद में इसे रद्द करना पड़ा ), संस्कृति मंत्री के. सी. जोसेफ ( 1982 से लगातार विधायक हैं), बेन्नी बेहनान (सौर्य पैनल घोटाले के अभियुक्त) और राजधानी के जिले पारासाला विधानसभा क्षेत्र से विधायक ए. टी. जॉर्ज हैं।

इन पांचों में प्रकाश और जॉर्ज राज्य के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला गुट के हैं जबकि शेष तीनों चांडी के सबसे करीबियों में माने जाते हैं।

चांडी अपने विचार से राष्ट्रीय नेतृत्व को अवगत करा चुके हैं कि यदि यही मानक हैं तो वह खुद उनमें से हैं जो सर्वाधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं और वह 1970 से ही हर चुनाव जीतते आ रहे हैं। इसलिए वह भी चुनाव मैदान से अलग रहेंगे।

वर्ष 2004 का लोकसभा चुनाव हार चुके सुधीरन 2014 में तब राजनीतिक सुर्खियों में आ गए जब राहुल गांधी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पसंद किया। किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी। तभी से चेन्निथला और चांडी गुट सुधीरन के उपायों की काट खोजता रहा है।

अब सभी की निगाहें पार्टी आलाकमान पर है जो इस मुद्दे पर शुक्रवार को अंतिम फैसला देगा।

140 सदस्यीय केरल विधानसभा का चुनाव 16 मई को होना है।

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