जम्मू, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय संविधान के क्रियाशील सिद्धांत भाईचारा, गरिमा और एकता केवल न्याय, स्वतंत्रता और समानता से ही हासिल किया जा सकता है। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शनिवार को यहां यह बातें कही।
उन्होंने यह बातें जम्मू विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को हासिल करने में न्यायापालिका की अहम भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि लोग सामाजिक समस्याओं को सुलझाने के लिए तेजी से न्यायापालिका की तरफ जा रहे हैं क्योंकि यह उनकी पहुंच में है।
उन्होंने कहा, “संवैधानिक पाठों में निहित सिद्धांतों के अलावा, सरकारी आंकड़ों की नीतिगत घोषणाएं अक्सर अवसर के अनुरूप नहीं होती है और इन मुद्दों पर न्यायिक घोषणाएं ही उचित प्रकाश डालती हैं।”
उपराष्ट्रपति ने कहा, “जब तक अदालत हर संभव तरीके से यह आश्वस्त करने का प्रयास नहीं करता कि कानून और संविधान सभी नागरिकों के लिए बराबर है। तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि अदालत ने अपनी न्यायिक जिम्मेदारियों को पूरा किया है।”
इस मौके पर जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल एन.एन. बोहरा, भारत के मुख्य न्यायाधीश टी. एस. ठाकुर, जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति आर. डी. शर्मा और अन्य गणमान्य लोगों के अलावा बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।
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