कोयला घोटाले में पहली सजा, 2 निदेशकों को 4 साल कैद (लीड-1)

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। सीबीआई की विशेष अदालत ने कोयला घोटाला मामले में सोमवार को पहली सजा सुनाई। अदालत ने झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के दो निदेशकों को आपराधिक साजिश रचने और कोयला ब्लॉक पाने के लिए धोखाधड़ी करने का दोषी मानते हुए दोनों को चार-चार साल कैद की सजा सुनाई।

अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा, “सफेदपोश अपराधी समाज के लिए ज्यादा खतरनाक होते हैं।”

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश भरत पाराशर ने जेआईपीएल के निदेशकों आर.सी. रूंगटा (60)और आर.एस. रूंगटा (79)को चार-चार साल जेल तथा पांच लाख जुर्माना की सजा सुनाई।

अदालत ने झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने कहा कि छोटे मोटे अपराध जैसे ठगी और डकैती कुछ हजार रुपये के होते हैं। लेकिन सफेदपोश अपराध तो लाखों नहीं करोड़ों के होते हैं। सफेदपोश अपराधों ने हाल के दिनों में लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि इससे जुड़े लोग अपने पेशे में उच्च आय वर्ग के होते हैं। ऐसे लोगों के अपराधों को पता लगाना बड़ा मुश्किल होता है। ये लोग प्रशिक्षित दिमाग से योजना बनाकर अपराध को अंजाम देते हैं।

अदालत ने पिछले हफ्ते कंपनी के निदेशकों आर.सी. रूंगटा और आर.एस. रूंगटा को भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया था। अदालत ने तजबीज किया कि इन लोगों ने जेआईपीएल को झारखंड स्थित उत्तरी धादू कोयला बलॉक का आवंटन दिलाने में सरकार को धोखा दिया।

अदालत में जब सजा सुनाई जा रही थी तो दोनों रूंगटा भी उपस्थित थे। ये दोनों निदेशक पहले से ही हिरासत में हैं।

इस मामले के अलावा कोयला खंड आवंटन घोटाला के 19 अन्य मामलों की भी जांच सीबीआई ने की है जो विशेष अदालत में लंबित हैं।

कोयला घोटला से जुड़े दो अन्य मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशलय ने भी की है। ये मामले भी विशेष अदालत में लंबित हैं।

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