करनाल, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने बुधवार को हरियाणा के करनाल में शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि रोगमुक्त गुणवत्ता युक्त रोपण सामग्री का उत्पादन आलू की कृषि में एक मुख्य रुकावट है तथा देश को अच्छे गुणवत्तायुक्त आलू के बीजों की बड़ी मात्रा में आवश्यकता है।
इस समय आलू के बीजों की आवश्यकता पूरी करने के लिए टिशू कल्चर तकनीकों के द्वारा माइक्रो ट्यूबर के उत्पादन के लिए नई तकनीकों को मानकीकृत किया गया है। करनाल में आलू प्रौद्योगिकी केंद्र खुलने से न केवल समय पर रोगमुक्त रोपण सामग्री बड़ी मात्रा में उपलब्ध होगी, अपितु इसके द्वारा आलू की नई किस्मों के प्रचार प्रसार में भी मदद मिलेगी।
सिंह ने कहा कि हम अपने जीवन में प्राय: रोज ही आलू खाते हैं। आलू में प्रमुख खाद्य फसलों के बीच सर्वाधिक पोषक तत्व प्रदान करने और प्रति यूनिट क्षेत्र ड्राइ मैटर उत्पन्न करने की क्षमता है। यह वह फसल है जिसके द्वारा भावी वैश्विक खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन का निदान होगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि जैसा कि हम जानते है कि आलू प्रोटीन और विटामिन बी से भरपूर होते हैं। उनमें ऐसे तत्वों का समावेश होता है जिनके द्वारा शारीरिक विकास में मदद मिलने के साथ स्मृति क्षमता बढ़ती है। इसलिए नियमित रूप से आलू खाने से न केवल हमारा स्वास्थ्य बनता है अपितु ये हमें युवा और स्मार्ट भी बनाए रखते हैं।
सिंह ने बताया कि कृषिगत जीडीपी के परिप्रेक्ष्य में आलू की मौजूदा भागीदारी 1.32 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र से बढ़कर 2.86 प्रतिशत हो गई है। इसके विपरीत दो प्रमुख खाद्य फसलें अर्थात चावल और गेहूं क्रमश: 31.19 और 20.56 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र (एफएओस्टेट) के सापेक्ष 18.25 प्रतिशत और 8.22 प्रतिशत का योगदान करती हैं। इससे यह पता चलता है कि कृषि जीडीपी में कृषि योग्य भूमि की प्रति इकाई से आलू का योगदान चावल के मुकाबले लगभग 3.7 गुना और गेहूं के मुकाबले 5.4 गुना अधिक है।
उन्होंने कहा कि भारत में 2025 के दौरान आलू की मांग लगभग 5.5 करोड़ टन और 2050 के दौरान 12.2 करोड़ टन हो जाएगी। प्रसंस्करण गुणवत्तायुक्त आलू की मांग क्रमश: वर्ष 2025 और 2050 में 27 लाख टन के मौजूदा स्तर से बढ़कर क्रमश: 60 और 250 लाख टन हो जाएगी।
इसी प्रकार ताजे आलुओं की मांग वर्ष 2025 और वर्ष 2050 के दौरान मौजूदा 2.4 करोड़ टन से बढ़कर क्रमश: 3.8 और 7.8 करोड़ टन हो जाएगी। यद्यपि आलू के बीजों की मांग वर्ष 2050 तक लगभग 2.1 गुणा अधिक (29.6 से 61 लाख टन) हो जाएगी।
इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री, हरियाणा के कृषि मंत्री, हरियाणा के कृषि राज्य मंत्री, सांसद और विधायक भी उपस्थित थे।
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