लंदन, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। युवाओं को दी जाने वाली यौन शिक्षा को केवल गर्भावस्था या यौन रोगों पर केंद्रित न करते हुए उसमें लैंगिक समानता को भी शामिल करना चाहिए। एक शोध में इसकी तत्काल जरूरत बताई गई है।
लंदन, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। युवाओं को दी जाने वाली यौन शिक्षा को केवल गर्भावस्था या यौन रोगों पर केंद्रित न करते हुए उसमें लैंगिक समानता को भी शामिल करना चाहिए। एक शोध में इसकी तत्काल जरूरत बताई गई है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक बात जब मुख मैथुन की आती है तो असमानता स्पष्ट रूप से दिखती है। जबकि अक्सर समान रूप से सक्रियता की बात की जाती है। किसी महिला के साथ मुख मैथुन, पुरुष के साथ मुख मैथुन से काफी ‘बड़ा मुद्दा’ है।
अमेरिका के पैसिफिक विश्वविद्यालय के रूथ लेविस का कहना है, “संभोग पर कई सारे शोध हुए हैं लेकिन हम युवाओं की उम्मीदों और उनके तरह-तरह के यौन व्यवहारों के अनुभव बारे में काफी कम जानते हैं।”
सेक्स रिसर्च जर्नल में प्रकाशित इस शोध में लेविस ने कहा है, “यह एक खोजपूर्ण अध्ययन था जिसमें हमें युवाओं द्वारा मुख मैथुन के बारे में की जाने वाली चर्चाओं का पता चला।”
यह अध्ययन 16 से 18 साल की उम्र के 71 युवक-युवतियों पर किया गया। इसमें मुख्य जोर पुरुष और महिला के बीच किए जाने वाले मुख मैथुन पर था, न कि समलैंगिक संबंधों में किए जाने वाले मुख मैथुन पर। इसमें भाग लेने वालों का लगातार एक साल तक साक्षात्कार किया गया।
शोध के दौरान पुरुषों और महिलाओं दोनों ने बताया कि महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के लिए मुखमैथुन ज्यादा अरुचिकर है। वहीं, पुरुष जब इसे नहीं चाहते हैं तो महिलाओं के मुकाबले बड़ी आसानी से मना कर देते हैं।
लेविस बताते हैं, “यह स्पष्ट है कि हमें युवक-युवतियों को समाज में पुरुष और महिला के शरीर के बारे में की जाने वाली बातचीत को लेकर आलोचनात्मक ढंग से सोचने के लिए, सहमति और दुष्कर्म के बीच का फर्क समझने के लिए और व्यवहार में लैंगिक समानता लाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।”
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