पटना स्थित गंगा नदी पर दीघा पुल के निर्माण से रेलमार्ग का सफर राहत भरी होगी। इससे गोरखपुर से पटना की दूरी भी कम हो गई है। फिलहाल, गोरखपुर से दो पैसेंजर ट्रेन पाटलिपुत्र तक चल रही हैं।
दरअसल, हाल ही में दिल्ली में देशभर के परिचालन विभाग के संबंधित अधिकारियों की बैठक में दीघा पुल और पूर्वोत्तर रेलवे रूट पर भी विस्तार से चर्चा हुई थी। ट्रेनों के बीच गैप खोजा रहा है। इसके लिए पूर्वोत्तर रेलवे प्र और पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर में विमर्श शुरू है।
रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, रूट निर्धारण को लेकर भी मंथन जारी है। गोरखपुर से लखनऊ तक की यात्रा बढ़नी-गोंडा के रास्ते पूरी होगी या मुख्य मार्ग से, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
गोरखपुर से लखनऊ, वाराणसी और पटना के बीच की दूरी लगभग समान है। इसके बाद भी पटना की राह पहाड़ चढ़ने जैसी है। रेल गाड़ियां हाजीपुर से ही बरौनी और मुजफ्फरपुर की तरफ मुड़ जाती हैं। पटना जाने वाले नौकरीपेशा, व्यवसायी, छात्र, मरीज और आम यात्रियों को हाजीपुर में ही उतरना पड़ता है।
पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय गोरखपुर ऐसे किसी सीधे रूट पर नहीं पड़ रहा था, जो किसी प्रदेश की राजधानी को देश की राजधानी से जोड़ता हो। कोलकाता से चलने वाली राजधानी पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा-बलिया रूट से होकर गुजर जाती है।
अब पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन जोन मुख्यालय गोरखपुर के रास्ते पटना से लखनऊ होते हुए दिल्ली तक राजधानी एक्सप्रेस चलाने की तैयारी में भी जुट गया है।
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