नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। आधुनिक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के डॉक्टरों की सबसे बड़ी और पुरानी स्वतंत्र प्रतिनिधि संस्था, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सोमवार को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आए दो ऐतिहासिक फैसलों का स्वागत किया है।
पहले फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय की एक पीठ ने आईएमए की इस मांग पर मोहर लगा दी कि भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों पर आधुनिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करने पर पाबंदी लगाई जाए। दूसरे फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने मेडिकल पाठ्यक्रमों में देश भर के लिए राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा लागू करने का आदेश दिया है।
आईएमए के मानद महासचिव पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “यह गर्व का मौका है कि हमारी भारतीय चिकित्सा पद्धति से इलाज करने वालों पर आधुनिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करने पर पाबंदी लगाने का एक दशक लंबा संघर्ष सफल हुआ। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने हमारा राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा लागू करने का सुझाव मान लिया है। ये फैसले चिकित्सा पेशे की पवित्रता को सुरक्षित रखने और इसे ज्यादा जिम्मेदार, पारदर्शी और प्रभावशाली बनाने में मदद करेंगे।”
उन्होंने कहा, “आईएमए एक दशक से कह रही है कि अन्य चिकित्सा पद्धतियों से इलाज करने वालों द्वारा आधुनिक चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) से इलाज करना लोगों की सेहत के लिए खतरनाक और असुरक्षित है। हम मेडिकल परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा लागू करने का भी समर्थन कर रहे थे। पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉ. केतन देसाई ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा की रूपरेखा बनाने में अहम भूमिका निभाई।”
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